अमेरिका के दिग्गज इकोनॉमिस्ट स्टीव हांके ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के पाकिस्तान को ‘दलाल’ बताने वाले बयान का समर्थन किया है। स्टीव हांके अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में एप्लाइड इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं और ‘फॉर्च्यून’ मैगजीन के लिए नियमित रूप से लेख लिखते हैं।स्टीव हांके ने इससे पहले ये कहकर ट्रंप प्रशासन को घटघरे में खड़ा किया था कि अमेरिका, ईरान युद्ध हार रहा है। उन्होंने बार बार कहा है कि अमेरिका की स्थिति ईरान के सामने कमजोर पड़ रही है और अगर ऐसी ही स्थिति रही तो अमेरिका, ईरान के खिलाफ युद्ध हार जाएगा।
वहीं स्टीव हांके भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की तारीफ करते हुए उन्हें एक ‘समझदार इंसान’ कहा है। जयशंकर ने पाकिस्तान को ‘दलाल देश’ कहते हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध में किसी भी तरह की भूमिका निभाने से साफ इनकार कर दिया था। स्वीट हांके ने जयशंकर की इस कदम की तारीफ की है और कहा है कि ‘कोई भी समझदार इंसान ऐसा ही करेगा।’
स्टीव हांके ने पाकिस्तान को ‘दलाल’ कहने वाले जयशंकर की तारीफ की
स्टीव हांके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जयशंकर की बात को सीधे तौर पर कोट किया है और उनके इस रुख का समर्थन किया है। उन्होंने अपनी बात को और अच्छे से समझाने के लिए एक कार्टून भी शेयर किया है। इसमें एक तरफ जयशंकर शांत और आत्मविश्वास से भरे खड़े दिख हैं और इसके साथ भारत की ‘रणनीतिक हितों’ और ‘साफ प्राथमिकताओं’ को दिखाया गया है। वहीं दूसरी तरफ अफरा-तफरी, अमेरिका, पाकिस्तान (जिसे बिचौलिया कहा गया है) और ईरान को युद्ध के माहौल और उलझी हुई कूटनीति के बीच दिखाया गया है।
इस कार्टून के साथ स्वीट हांके ने लिखा है कि ‘भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कहना है कि ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध में भारत, पाकिस्तान जैसा बिचौलिया देश नहीं बनेगा।’ उन्होंने आगे लिखा है कि ‘एस जयशंकर एक बुद्धिमान व्यक्ति हैं।’ स्टीव हांके ने जयशंकर के इस बयान को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति से जोड़ा है। पाकिस्तान बार बार खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है जबकि ईरान तैयार नहीं हो रहा है। इसके अलावा एक्सपर्ट्स का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप किसी समझौते पर अगर पहुंच भी जाते हैं फिर भी वो अगले सेकंड क्या करने वाले हैं ये किसी को पता नहीं, ऐसे में मध्यस्थ देश के पास शर्मिंदगी के अलावा कुछ नहीं बचता। और जयशंकर इस बात को समझ रहे हैं।
‘भारत को अपने हितों से मतलब’
स्टीव हांके साफ तौर पर भारत के उस रूख की तारीफ कर रहे हैं जिसमें उसने खुद को ‘बिचौलिए’ देश की तरह पेश नहीं किया है। इसका मतलब है कि भारत का रूख साफ है, उसका हाथ साफ है और भारत जानता है कि उसके हित किसमें हैं और उसकी प्राथमिकताएं क्या हैं जबकि कई देश इस संघर्ष में खुद घसीटे जा रहे हैं। इससे पहले स्टीव हांके ने अमेरिका की हार की ‘भविष्यवाणी’ करते हुए कहा था कि ‘ईरान वो देश नहीं है जो घेराबंदी में फंसा है, बल्कि ईरान वो देश है जो इस ‘घसीटे जाने वाले युद्ध’ को जीत रहा है।’ उन्होंने कहा था कि ‘ईरान ने दस लाख से ज्यादा सैनिकों को तैनात किया है और उस अहम रास्ते (होर्मुज स्ट्रेट) पर उसका नियंत्रण है जिस पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था निर्भर करती है।’























































