एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने शुक्रवार को राज ठाकरे से महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार प्लेन क्रैश मामले पर मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद राज ठाकरे ने कहा कि सरकार खुद इस मामले में संदेह निर्माण कर रही है. उन्होंने सवाल किया कि यह वास्तव में हादसा था या कुछ और था. रोहित पवार लगातार अजित पवार के प्लेन क्रैश पर सवाल उठा रहे हैं और एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए जांच की मांग कर रहे हैं.राज ठाकरे ने कहा कि देखिए, उन्होंने आकर मुझे सब कुछ समझाया. बात यह है कि अजित पवार के जाने के बाद इस घटना को लेकर कई तरह के संदेह अबभी तैर रहे हैं. मैंने पहले भी इसका जिक्र किया है—क्या यह दुर्घटना एक वास्तविक हादसा था या कुछ और? महाराष्ट्र अभी तक इसे समझ नहीं पाया है.राज ठाकरे ने कहा कि ऐसी स्थिति में उन्होंने आकर वे सभी तकनीकी विवरण समझाए, जो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी बताए थे. उनकी सभी बातों से मैंने केवल एक बात गौर की: उन्होंने तीन अलग-अलग जगहों पर एफआईआर दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया.
FIR दर्ज नहीं करने पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि पुलिस थानों को एफआईआर दर्ज न करने के लिए कहा गया था. यहीं पर संदेह बढ़ता है. सरकार या पुलिस प्रशासन को ऐसा क्यों लगता है कि उन्हें इसे दर्ज नहीं करना चाहिए?राज ठाकरे ने कहा कि जब वे मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन गए, तो वहां के अधिकारी एफआईआर टाइप कर रहे थे. अचानक डीसीपी आए और उनसे कहा कि एफआईआर दर्ज न करें. ऐसा क्यों हो रहा है? मुझे लगता है कि अगर दुर्घटना के पीछे कुछ नहीं है, अगर यह कोई साजिश नहीं थी, लेकिन अगर परिवार के सदस्यों को संदेह है या वे उचित जांच चाहते हैं, तो सरकार बाधाएं क्यों पैदा कर रही है?
सरकार खुद पैदा कर रही है संदेह
उन्होंने कहा कि आज सुनेत्रा बहन भी वहां हैं, उपमुख्यमंत्री भी हैं; मुझे लगता है कि उन्हें भी इस बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि यह उनके पति की दुर्घटना थी. एफआईआर उनके पति की दुर्घटना के बारे में है, और सरकार की ओर से इसे दर्ज न करने का दबाव है.राज ठाकरे ने कहा कि मुझे इसके पीछे की राजनीति नहीं पता, लेकिन जब एफआईआर दर्ज करने में बाधाएं पैदा की जाती हैं, हालांकि यह कहा जाता है कि कोई भी एफआईआर दर्ज कर सकता है, और फिर उन लोगों के लिए बाधाएं पैदा की जाती हैं, जो इसे दर्ज करने जाते हैं, तो यह स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करता है.















