डॉ. बशीर बद्र की याद में सजी अदबी महफिल, देर रात तक गूंजती रही शायरी.

मुज़फ्फरनगर। उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (यूडीओ) के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मरहूम शायर डॉ. बशीर बद्र की याद में “याद-ए-डॉ. बशीर बद्र” शीर्षक से शोक सभा एवं भव्य मुशायरे का आयोजन मुस्तफा कॉलोनी स्थित महादुल बनात में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों, उर्दू शायरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने भाग लेकर महान शायर को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता उस्ताद-उश-शोअरा डॉ. सदाकत देवबंदी ने की, जबकि संचालन प्रसिद्ध शायर कलीम त्यागी ने किया।

शोक सभा के दौरान वक्ताओं ने डॉ. बशीर बद्र की साहित्यिक सेवाओं और उर्दू अदब में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बशीर बद्र ने अपनी शायरी के माध्यम से मोहब्बत, इंसानियत, सामाजिक सरोकारों और जीवन के विभिन्न पहलुओं को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया। मौलाना जमशेद कासमी ने कहा कि डॉ. बशीर बद्र का जीवन संघर्ष, सब्र और हिम्मत की मिसाल रहा। उन्होंने जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन साहित्य की सेवा का सिलसिला कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि जीवन के अंतिम वर्षों में वह स्मृति संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और लंबे समय तक अस्वस्थ रहने के बाद ईद-उल-अजहा के दिन उनका निधन हो गया। उनके निधन से उर्दू साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

शोक सभा के उपरांत मुशायरे का आगाज़ कारी मोहम्मद यामीन की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। इसके बाद उस्ताद अब्दुल हक़ सहर ने नात-ए-पाक पेश कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया। मुशायरे में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शायरों ने अपने चुनिंदा कलाम पेश किए और डॉ. बशीर बद्र को श्रद्धांजलि दी। डॉ. सदाकत देवबंदी ने अपने अशआर के माध्यम से महान शायर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। वहीं अब्दुल हक़ सहर, डॉ. तनवीर गौहर, अहमद मुज़फ्फरनगरी, सलामत राही, डॉ. ताहिर कमर मीरापुरी, जुनैद अख्तर कांधलवी, उस्मान उस्मानी, अरशद ज़िया, अल्ताफ मशअल, तहसीन कमर असारवी, कलीम त्यागी, डॉ. तहसीन समर और हाशिम चरथावली सहित अनेक शायरों ने अपने प्रभावशाली कलाम पेश कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। शायरों की प्रस्तुति पर बार-बार तालियों की गूंज सुनाई देती रही और पूरा माहौल अदबी रंग में रंगा नजर आया।

कार्यक्रम देर रात लगभग तीन बजे तक चलता रहा। इस दौरान उर्दू भाषा, साहित्य और शायरी की परंपरा को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बशीर बद्र की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मदरसे के मोहतमिम मौलाना अकरम नदवी तथा भारत मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. रविश आलम मौजूद रहे। इसके अलावा हाजी आसिफ राही, गौहर सिद्दीकी, इकराम कस्सार, शाहिद आलम, मोहम्मद समीर आलम, डॉ. खुर्रम, साजिद त्यागी, इशरत हुसैन त्यागी, मोहम्मद अली अलवी, इंजीनियर नफीस राणा, डॉ. फैसल सिद्दीकी सहित यूडीओ की पूरी टीम और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. बशीर बद्र की मगफिरत और उर्दू अदब की तरक्की की दुआ के साथ हुआ।

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