मुजफ्फरनगर। जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन ठाकुर रामनाथ सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलने की जानकारी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए उनकी चेयरमैनी बहाल कर दी है। इस फैसले से रामनाथ सिंह के समर्थकों में खुशी का माहौल है, वहीं जिला सहकारी बैंक की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है।
ठाकुर रामनाथ सिंह जून 2023 में मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक के सभापति निर्वाचित हुए थे। वह किसान सेवा समिति खेड़ा मस्तान के प्रतिनिधि के रूप में बैंक के संचालक मंडल में शामिल हुए थे। उनके साथ पंकज पाल और बृजेंद्र सिंह मलिक भी सहकारी समितियों के प्रतिनिधि के तौर पर संचालक मंडल का हिस्सा बने थे।
इस मामले में बुढ़ाना निवासी सचिन कुमार जैन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर तीनों की सदस्यता को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि सहकारी समितियों के पुनर्गठन और विभाजन के बाद पुरानी समितियों से उनका प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया था। इसी आधार पर उनकी संचालक मंडल की सदस्यता की वैधता पर सवाल उठाए गए थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने 7 सितंबर 2026 को रिट याचिका संख्या 7367/2026 पर सुनवाई के बाद रामनाथ सिंह, पंकज पाल और बृजेंद्र सिंह मलिक को प्रबंध समिति में बने रहने के अयोग्य माना था। हाईकोर्ट के इस फैसले से रामनाथ सिंह की चेयरमैनी प्रभावित हुई थी।
इसके बाद रामनाथ सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी चेयरमैनी बहाल होने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम को जिला सहकारी बैंक की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की विस्तृत शर्तों और प्रभाव की पुष्टि आधिकारिक आदेश से की जानी आवश्यक है।















