यूपीआई से गाड़ी-घर की EMI चुकाने पर क्‍या लगेगी फीस?

यूपीआई का इस्‍तेमाल आज भारत में धड़ल्‍ले से हो रहा है. यही वजह है कि इस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की घोषणा होते ही आम आदमी थोड़ा चिंतित है. राहत की बात यह है कि 2000 रुपये से नीचे के यूपीआई पेमेंट पर कोई फीस नहीं लगेगी.न ही एक व्‍यक्ति से दूसरे को की गई पेमेंट पर कोई चार्ज देना होगा. कुछ लोगों के मन में ये सवाल है कि हर महीने कार, बाइक या होम लोन की ईएमआई गूगल पे, फोनपे या पेटीएम जैसे यूपीआई ऐप्‍स से चुकाने पर क्‍या एमडीआर लगेगा? अगर लगेगा तो इसे चुकाएगा कौन?

सबसे पहले तो यह जान लें कि यूपीआई एमडीएआर शॉपिंग और मर्चेंट पेमेंट्स तक सीमित नहीं रहने वाला है. लोन रिपेमेंट और ईएमआई भी अगर यूपीआई से किया जाएगा और रकम 2000 रुपये से ज्‍यादा होगी तो एमडीआर यानी फीस लगेगी. लेकिन, अच्‍छी बात यह है कि हर महीने EMI भरते वक्त आपकी जेब से एक नया पैसा भी एक्स्ट्रा आपको नहीं देना होगा.

हर पेमेंट पर बस 5 रुपये देनी होगी फीस

नए नियमों के मुताबिक, डेट कलेक्शन (Loan Repayment) कैटेगरी के तहत होने वाले ₹2,000 से ज्यादा के हर UPI ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट एमडीआर तय किया गया है. अगर आप एनबीएफसी या किसी बैंक को ₹5,000 की गाड़ी की ईएमआई या ₹25,000 का होम लोन रिपेमेंट यूपीआई के जरिए भेजते हैं, तो उस ट्रांजैक्शन पर यह ₹5 का चार्ज ट्रिगर होगा. क्‍योंकि एमडीआर मूल रूप से मर्चेंट-साइड शुल्क है. इसका मतलब साफ है कि लोन चुकाने वाले ग्राहक से यह पैसा सीधे नहीं वसूला जा सकता. यह खर्च लोन देने वाले बैंक, एनबीएफसी या उनकी रिकवरी व कलेक्शन एजेंसी को अपनी जेब से उठाना होगा.क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट्स के मामले में भी यही व्यवस्था लागू होती है. पेमेंट प्रोसेसिंग की लागत मर्चेंट बैंक की ओर से कार्ड जारीकर्ता कंपनी वहन करती है, आम ग्राहक नहीं. अगर आपने अपनी ईएमआई के लिए यूपीआई ऑटोपे या ई-मैनडेट सेट कर रखा है, तो आपके लिए अच्छी खबर है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया डिजिटल ऑटोमेशन को बढ़ावा देता है. इसलिए, भले ही आपकी ऑटो-डेबिट होने वाली ईएमआई ₹2,000 से कितनी भी ज्यादा क्यों न हो, ऑटोपे कलेक्शन पर यह ₹5 का एमडीआर लागू नहीं होगा.

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