बाँदा। सरकार गांव-गांव में बेहतर इलाज का दावा करती है, लेकिन बांदा के नरैनी ब्लॉक के पडमई गांव में ये दावे कागजों पर ही दम तोड़ रहे हैं। यहां लाखों रुपये खर्च कर बना स्वास्थ्य उपकेंद्र पिछले 10 से 15 साल से बंद पड़ा है। आलम यह है कि करोड़ों की सरकारी इमारत अब खंडहर और भूत बंगले में तब्दील हो गई है। उत्तर प्रदेश चिकित्सा विभाग ने ग्रामीणों को इलाज देने के लिए इस पक्के भवन को बनवाया था, लेकिन उद्घाटन से पहले ही इस पर ताला जड़ दिया गया। आज मुख्य गेट पर जंग लग चुका है, दीवारें सीलन से काली पड़ गई हैं और परिसर में जंगली झाड़ियां उग आई हैं। अंदर आवारा मवेशी आराम फरमा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण एजेंसी ने आज तक भवन को स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर ही नहीं किया। ऊपर से बिजली-पानी का कनेक्शन तक नहीं, और एएनएम-स्टाफ की तैनाती भी नहीं हुई। नतीजा – बनते ही बंद।
इस लापरवाही की सबसे बड़ी सजा पडमई और आसपास के दर्जनों गांवों के गरीब ग्रामीण भुगत रहे हैं। बच्चों के टीके लगवाने हों या प्रसव कराना हो, लोगों को 5 किमी दूर नरैनी या 12 किमी दूर अतर्रा जाना पड़ता है। गंभीर हालत में 30 किमी दूर बांदा जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। कई बार रास्ते में ही मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस भूत बंगले को जल्द अस्पताल बनाया जाए और स्टाफ तैनात किया जाए। वहीं विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पल्ला झाड़ते हुए बोले मामला संज्ञान में आया है, बंद उपकेंद्रों की समीक्षा की जा रही है, जल्द ही इसे शुरू कराया जाएगा। सवाल यह है कि 15 साल से बंद पड़े इस अस्पताल की सुध लेने में विभाग को और कितने साल लगेंगे।















