नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में मुख्य आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक मंदिर के सामने चाय के खोखे पर उसका शव फंदे से लटका मिला. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था. वह मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र का रहने वाला था. पुलिस फिलहाल मौत के कारणों की जांच कर रही है.हरिद्वार पुलिस के अनुसार, शहर कोतवाली की सप्त ऋषि पुलिस चौकी को सूचना मिली थी कि सप्त सरोवर रोड स्थित एक चाय की दुकान में एक व्यक्ति मृत अवस्था में मिला है. पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली निवासी ग्राम मंगरुखाल, भिकियासैंण, अल्मोड़ा के रूप में हुई. बताया जा रहा है कि सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और चाय का खोखा किराये पर लेकर कारोबार कर रहा था.शुरुआती जांच में पुलिस को दुकान से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. पुलिस का कहना है कि मौत के कारणों की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी. शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में हुई है, जो निठारी मामले में आरोपी रहा था. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है. मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है.
कौन था सुरेंद्र कोली?
सुरेंद्र कोली का नाम नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में सामने आया था. दरअसल, दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी इलाके में एक मकान के पीछे नाले से बच्चों के कंकाल और अवशेष मिला था. कोली उस मकान में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था. मकान मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर भी मामले में आरोपी रहे थे. कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया था और उसे मौत की सजा भी सुनाई गई थी. हालांकि बाद में कई मामलों में उसे राहत मिल थी.
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी हत्याकांड से जुड़े एक मामले में सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धि और मौत की सजा को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया था. कोर्ट ने अभियोजन के सबूतों और कथित बरामदगी को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे.इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े आखिरी लंबित मामले में भी कोली की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया. कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव पिटीशन मंजूर करते हुए कहा कि वह किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए. इससे उसके खिलाफ निठारी कांड से जुड़े सभी आपराधिक मामले बंद हो गए थे.















