महिला अपराध पर 9 साल में 10 हजार से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार, 8070 का चालान.

बांदा। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार की सख्त नीति का असर अब आंकड़ों में साफ दिखने लगा है। 15 मार्च 2017 से 15 सितंबर 2026 तक बाँदा जिले में महिला संबंधी अपराधों में दर्ज मामलों में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अपराधियों पर शिकंजा कसा है।पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साढ़े नौ साल में महिला अपराध के कुल 14361 नामजद अभियुक्तों में से 10289 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 8070 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट (चालान) कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। केवल 125 अभियुक्त ही गिरफ्तारी से शेष हैं, जिनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। दहेज हत्या (अन्य विधि से)कुल 1286 मामले दर्ज हुए जिसमे 639 आरोपी गिरफ्तार हुए 482 आरोपियों का चालान हुआ। 456 मामले जांच में गलत पाए गए, जिससे स्पष्ट है कि पुलिस ने झूठे मुकदमों में भी न्याय किया। जनपद में दहेज उत्पीड़न के सबसे ज्यादा 8811 नामजद लोगो पर मुकदमे दर्ज हुए। जिसमें से 6308 लोगो को गिरफ्तार किया गया और 4814 आरोपियों का चालान किया गया। योगी सरकार में महिलाओं की शिकायत पर तत्काल एफआईआर और गिरफ्तारी हुई है। योग शीलभंग / छेड़छाड़ में 1965 मामलों में 1764 आरोपी गिरफ्तार हुए 1554 आरोपियों का चालान हुआ।योग बलात्कार में 447 मामलों में 330 आरोपी गिरफ्तार हुए 320 का चालान हुआ। नाबालिग से दुष्कर्म के 98 मामलों में 79 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। दहेज मृत्यु जलने से 157 मामलों में 72 गिरफ्तार कर जेल भेजें गए।

अपहरण के 1080 मामलों में 647 गिरफ्तार कर जेल भेजे गए। दुर्व्यापार के 11 मामले में आरोपियों में से 5 का चालान कर कड़ी कार्यवाही की गई।आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार में महिला अपराधों में फर्जी केसों की छंटनी कर पीड़ितों को न्याय और निर्दोषों को राहत दोनों दी गई है। 152 मामले गलत प्रकाश में आए। अज्ञात आरोपियों को भी ट्रेस किया गया। महिला हेल्प डेस्क, मिशन शक्ति और एंटी रोमियो अभियान के चलते अब बाँदा जिले में छेड़खानी के 134 में से 133 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि धारा 509 में जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं महिला अपराध में कोई समझौता नहीं, तुरंत मुकदमा दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सजा दिलाओ इसी का नतीजा है कि 9 साल में 70% से अधिक आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है और 1190 मामलों में अंतिरिम रिपोर्ट लगाकर पीड़ितों को अनावश्यक दौड़-भाग से बचाया गया है।

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