मुजफ्फरनगर। इस्लामिया इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति के चुनाव को लेकर एक बार फिर मामला चर्चा में है। चुनावी प्रक्रिया के बीच साधारण सभा की सदस्यता से जुड़ा प्रस्ताव वापस लिए जाने के बाद कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले ही नए सदस्यों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद सदस्यता के लिए बाकायदा सूचना प्रकाशित की गई, लेकिन अब उसी प्रक्रिया से संबंधित प्रस्ताव को वापस लिए जाने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
पहले सदस्य बनाने का फैसला, फिर अचानक क्यों बदला निर्णय?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 28 जून 2026 को हुई बैठक में साधारण सभा के सदस्य बनाए जाने के लिए आवेदन आमंत्रित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद 12 अगस्त 2026 को सदस्यता के लिए सूचना प्रकाशित की गई।यानी सदस्यता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया गया था।लेकिन 30 अगस्त 2026 को पारित प्रस्ताव में पुराने सदस्यता संबंधी प्रस्ताव को रिकॉल/निरस्त कर दिया गया।दस्तावेज में इसके पीछे “अपरिहार्य कारणों” का उल्लेख किया गया है। मगर सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे अपरिहार्य कारण आखिर क्या थे.यदि सदस्यता प्रक्रिया में कोई तकनीकी, कानूनी या प्रशासनिक समस्या थी तो उसे स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखा गया और यदि कोई समस्या नहीं थी तो पहले सदस्यता की सूचना जारी करने के बाद अचानक उसी प्रक्रिया को रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
चुनाव से पहले सदस्यता का मुद्दा बना सबसे बड़ा सवाल
किसी भी प्रबंध समिति के चुनाव में सदस्यता और मतदाता सूची की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया के दौरान नए सदस्यों को शामिल करने या सदस्यता प्रक्रिया रोकने का सीधा असर भविष्य की चुनावी तस्वीर पर पड़ सकता है।इसी वजह से कॉलेज से जुड़े लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर सदस्यता प्रक्रिया को लेकर बार-बार निर्णय क्यों बदल रहे हैं?कुछ लोगों का आरोप है कि यदि बड़ी संख्या में नए सदस्य साधारण सभा में शामिल होते हैं तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। इसी कारण सदस्यता प्रक्रिया को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।हालांकि, यह आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
प्रबंधन की भूमिका पर उठ रहे सवाल.
इस पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है।सवाल यह नहीं है कि सदस्यता प्रस्ताव वापस क्यों लिया गया। सवाल यह है कि प्रस्ताव वापस लेने की वास्तविक वजह क्या है?
“अपरिहार्य कारण” आखिर कौन से हैं?
इन कारणों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया12 अगस्त को सदस्यता की सूचना जारी करने के बाद 30 अगस्त को फैसला बदलने की नौबत क्यों आई?क्या सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले लोगों की प्रक्रिया का कोई भविष्य है क्या सदस्यता दोबारा शुरू की जाएगीऔर सबसे अहम प्रबंध समिति का चुनाव आखिर कब कराया जाएगा जिम्मेदार लोगों से मांगी जा रही है पारदर्शिता कॉलेज से जुड़े लोगों का कहना है कि चुनाव जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि प्रबंधन की ओर से सदस्यता प्रस्ताव वापस लेने के पीछे कोई वैध और अपरिहार्य कारण है तो उसे स्पष्ट रूप से सामने रखा जाना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी या आशंका की स्थिति न बने।वहीं, जिन लोगों ने सदस्यता प्रक्रिया में रुचि दिखाई है, उनके सामने भी यह सवाल है कि अब उनके आवेदनों का क्या होगा और आगे की प्रक्रिया किस आधार पर चलेगी।
क्या सदस्यता और चुनाव का आपस में कोई संबंध है?
पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है।क्या सदस्यता प्रक्रिया को रोकने का चुनाव से कोई संबंध है क्या नए सदस्यों के शामिल होने से संभावित चुनावी समीकरण बदल सकते हैं क्या इसी वजह से सदस्यता प्रक्रिया पर दोबारा विचार किया गया या फिर वास्तव में कोई ऐसा प्रशासनिक अथवा कानूनी कारण है, जिसके चलते प्रस्ताव वापस लेना पड़ा इन सवालों का जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप तय करने के बजाय प्रबंधन से स्पष्ट जवाब और दस्तावेजों के आधार पर पूरी स्थिति सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है।चुनाव कराने की मंशा पर भी सवाल कॉलेज से जुड़े लोगों के बीच सबसे बड़ी चर्चा अब चुनाव को लेकर है।यदि चुनाव कराना है तो सदस्यता प्रक्रिया कब शुरू होगी नई सदस्य सूची कब तैयार होगी मतदाता सूची किस आधार पर निर्धारित होगी और प्रबंध समिति के चुनाव की अगली तारीख कब घोषित की जाएगी इन सवालों का जवाब मिलना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सदस्यता और चुनाव की प्रक्रिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई मानी जाती है। अब किसका क्या रुख इस पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन से जुड़े सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है।यदि सदस्यता प्रस्ताव वापस लेने के पीछे कोई वैध कारण है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि प्रक्रिया में कोई कानूनी या तकनीकी अड़चन है, तो उसकी जानकारी संबंधित सदस्यों को दी जानी चाहिए।और यदि सदस्यता प्रक्रिया जल्द दोबारा शुरू होनी है, तो उसकी समयसीमा भी स्पष्ट की जानी चाहिए।फिलहाल 30 अगस्त 2026 के प्रस्ताव के बाद इस्लामिया इंटर कॉलेज की सदस्यता प्रक्रिया और प्रबंध समिति के चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।एक तरफ पहले सदस्यता के लिए सूचना जारी की गई, दूसरी तरफ कुछ ही समय बाद संबंधित प्रस्ताव को रिकॉल कर दिया गया।
अब सवाल यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वास्तविक कारण क्या है?
क्या यह केवल प्रशासनिक निर्णय है क्या कोई कानूनी या तकनीकी वजह सामने आई है या फिर सदस्यता और आगामी चुनाव को लेकर कोई ऐसा चुनावी समीकरण है, जिसकी वजह से फैसला बदला गया इन सभी सवालों का जवाब कॉलेज प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।अब देखना यह है कि प्रबंधन इस मामले में कब तक स्थिति स्पष्ट करता है, सदस्यता प्रक्रिया कब दोबारा शुरू होती है और इस्लामिया इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति का चुनाव आखिर कब कराया जाता है।फिलहाल 30 अगस्त का प्रस्ताव कई सवाल छोड़ गया है और इन सवालों के जवाब का इंतजार कॉलेज से जुड़े लोगों को है। इस वर्जन में खबर को आरोपात्मक नहीं बल्कि खोजी/जवाबदेही वाली पत्रकारिता के अंदाज़ में रखा है, ताकि प्रबंधन और जिम्मेदार पदाधिकारियों पर गंभीर सवाल भी उठें और बिना प्रमाण किसी को दोषी ठहराने का जोखिम भी न हो।






















































