अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का समर्थन किया है। ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट को अपने ऊर्जा ढांचे को उन रास्तों से दूर ले जाने की जरूरत है, जहां ईरान की वजह से रुकावट आ सकती है।ट्रंप ने यह बात संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) और अरब नेताओं के साथ एक बैठक में कही। इस दौरान उन्होंने कमर्शियन शिपिंग पर ईरान के हमलों का जिक्र किया।
ऊर्जा सप्लाई को ईरान से दूर करने पर जोर
ट्रंप ने कहा, ‘पड़ोसी देशों में कमर्शियल शिपिंग पर ईरान के आतंकवादी हमलों ने यह दिखा दिया है कि मिडिल ईस्ट के ऊर्जा ढांचे को ईरानी चेकपॉइंट्स से दूर ले जाने की जरूरत है। इसीलिए मेरा प्रशासन ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर’ और तेल बाहर निकालने के दूसरे तरीकों का जोरदार समर्थन करता है, चाहे वह पाइपलाइन हो या कुछ और।”ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ईरान के हमलों की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग पर बहुत असर पड़ा है, जो दुनिया के लिए ऊर्जा सप्लाई का एक अहम रास्ता है। होर्मुज के जलमार्ग से दुनिया की लगभग 20 फीसदी ऊर्जा सप्लाई होती है। 2025 में इस रास्ते हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरा। वहीं, दुनिया के कुल LNG व्यापार का लगभग 20 फीसदी इस रास्ते गुजरा।
ईरान ने होर्मुज में सप्लाई को किया बाधित
फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमला शुरू करने के जवाब में तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग को निशाना बनाया और इसे प्रभावी रूप से बाधित कर दिया है। ईरान के हमलों के चलते जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है। इस रुकावट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। खाड़ी क्षेत्र के देश तेल और गैस के परिवहन के लिए नए रास्तों को तलाश रहे हैं।
IMEC क्या है?
IMEC को साल 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान पेश किया गया था। यह मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट दो कॉरिडोर- ईस्टर्न और नॉर्दर्न- के जरिए एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ता है। ईस्टर्न कॉरिडोर भारत के बंदरगाहों को खाड़ी देशों के पोर्ट से जोड़ता है। वहीं, नॉर्दर्न कॉरिडोर सऊदी अरब और जॉर्डन से होते हुए जमीन के रास्ते इजरायल के हाइफा पोर्ट तक जाता है। वहां से आगे यह भूमध्य सागर के जरिए यूरोप के टर्मिनल से जुड़ता है। इसका मकसद एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप के बीच सामान और ऊर्जा परिवहन के लिए आसान वैकल्पिक रास्ता बनाना है।















