ऋषिकेश।42 अफ्रीकी और सेंट्रल-साउथ अमेरिकी देशों की यात्रा करने वाले लोगों को येलो फीवर की वैक्सीन अब केवल एम्स ऋषिकेश में ही लगेगी। अन्य किसी अस्पताल से वैक्सीन लगवाकर जाने पर इन देशों में छह दिन के लिए क्वारंटीन रहना पड़ सकता है।भारत सरकार की ओर से एम्स ऋषिकेश को उत्तराखंड का अधिकृत टीकाकरण सेंटर बनाया गया है। भारत सरकार के आदेश पर प्रदेश के सभी अस्पतालों में इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सीएमओ देहरादून डॉ. संजय जैन की ओर से एम्स ऋषिकेश, दून मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल कोरोनेशन, चार उप जिला अस्पतालों, पांच सीएचसी, सभी पीएचसी, सेना अस्पताल, सभी हेल्थ पोस्ट और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को एक पत्र जारी किया गया है।
राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी की ओर से भारत सरकार के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के क्रम में येलो फीवर टीकाकरण संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं। जिसमें कहा गया कि नौ महीने से ऊपर की उम्र के यात्रियों को अधिकृत सेंटर पर 42 देशों की यात्रा से पहले टीका लगाना जरूरी है। टीकाकरण न होने की दशा में उन्हें छह दिन के लिए क्वारंटीन किया जाता है।
अमान्य-धोखाधड़ी वाले प्रमाण पत्र से बचें
अस्पतालों को भेजे पत्र में कहा गया कि भारत सरकार द्वारा बताया गया है कि अनाधिकृत केंद्रों में येलो फीवर का टीकाकरण किया जा रहा है। अमान्य एवं धोखाधड़ी वाले येलो फीवर वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं। जिनके मिलने पर यात्रियों को क्वारंटीन करना पड़ रहा है।
इन देशों की यात्रा के लिए जरूरी है वैक्सीन
साउथ अफ्रीका, केन्या, इजिप्ट, अल्जीरिया, घाना, नाइजीरिया, इथोपिया, सूडान, लीबिया, युगांडा आदि अफ्रीकी व सेंट्रल-साउथ अमेरिकी देशों की यात्रा के लिए येलो फीवर का वैक्सीन लगवाना जरूरी है। दून अस्पताल के एसोसिएट प्रोफेसर कुमार जी कौल कहते हैं कि यह तीव्र रक्तस्राव वाली बीमारी है। जो संक्रमित मच्छरों से ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैलती है। इसकी मृत्यु दर 60 फीसदी तक है। इसमें मरीज की त्वचा और आंखें पीली हो जाती हैं।
पहले कई अस्पतालों में लगती थी वैक्सीन
सीएमओ डॉ. जैन के मुताबिक पहले वैक्सीन अस्पतालों में लगवाने के बाद सीएमओ कार्यालय से सत्यापित किया जाता था। अब भारत सरकार के निर्देशों पर प्रदेश स्तर से आदेश मिले हैं। जिसमें 42 देशों की यात्रा के लिए केवल एम्स ऋषिकेश में ही वैक्सीनेशन होगा। अस्पतालों को कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति के आने पर उन्हें एम्स ऋषिकेश ही भेजें।















