सेना में स्थायी कमीशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने अपने फैसले में कहा कि महिला सैन्य अफसर सेना में स्थायी कमीशम की हकदार हैं.सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला देते हुए अनुच्छेद 142 के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल किया. सीजेआई सूर्यकांत ने महिला अधिकारियों को मिले स्थायी कमीशन को बरकरार रखने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा.
एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिला अधिकारियों के मूल्यांकन में मौजूद संस्थागत भेदभाव की कड़ी आलोचना की और कहा कि वे परमानेंट कमीशन की हकदार हैं. ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कोर्ट ने फैसला दिया कि महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन (PC) न देना मूल्यांकन के ढांचे में ही गहरे तक जमे भेदभाव का नतीजा था.
सीजेआई यानी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने फैसला सुनाया कि परमानेंट कमीशन के लिए प्रति वर्ष 250 महिला अधिकारियों की सीमा मनमानी है और इसे पवित्र नहीं माना जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा महत्वपूर्ण फैसला
सुनवाई के दौरान महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन पर कोर्ट की ऐतिहासिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देने से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीन प्रमुख मुद्दों पर विचार किया:
- क्या ACR (Annual Confidential Reports) का मूल्यांकन बिना उचित सोच-विचार के किया गया और इससे मेरिट प्रभावित हुई?
- क्या कुल स्कोर पर इसका असर पड़ा?
- क्या पहले स्थायी कमीशन न मिलने के कारण महिला SSC अधिकारियों के साथ अप्रत्यक्ष भेदभाव हुआ?
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की प्रमुख टिप्पणियां:
- सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि महिला अधिकारियों के ACR इस धारणा के साथ तैयार किए गए कि उन्हें कभी स्थायी कमीशन नहीं मिलेगा, जिससे उनके मूल्यांकन पर असर पड़ा.
- तय किए गए मापदंडों ने महिलाओं को पुरुष अधिकारियों की तुलना में नुकसान की स्थिति में रखा.
- ACR का आकलन समग्र और तुलनात्मक मेरिट के आधार पर नहीं किया गया.
- हर साल 250 महिला अधिकारियों को PC देने की सीमा को मनमाना (arbitrary) बताया गया और कहा कि इसे अंतिम या अटल नहीं माना जा सकता.
- पुरुष SSC अधिकारियों को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि स्थायी कमीशन केवल उनके लिए ही रहेगा.
भेदभाव पर सख्त रुख और उससे जुड़ी CJI की टिप्पणी:
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि महिला SSC अधिकारियों को स्थायी कमीशन से वंचित करना एक ऐसे मूल्यांकन ढांचे का परिणाम था, जिसमें गहरी जड़ें जमा चुका भेदभाव मौजूद था.
- ACR सही तरीके से न बनने के कारण उनके करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा.
विशेष शक्तियों का इस्तेमाल:
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारियों को न्याय दिलाने के लिए वह अपनी असाधारण शक्तियों (extraordinary powers) का उपयोग कर रहा है.
- यह फैसला रक्षा सेवाओं में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन (PC) से जुड़े मामले में नेशनल टाइम स्केल प्रमोशन के मुद्दे पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं.
कोर्ट की प्रमुख बातें:
-सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2024 के फैसले में दी गई व्याख्याएं (clarifications) इस मामले में भी लागू होंगी.
-कोर्ट ने स्थायी कमीशन को लेकर पहले दिए गए अपने और हाई कोर्ट के आदेशों के इतिहास का भी विस्तृत उल्लेख किया और कहा कि लागू करने में देरी से अधिकारियों को नुकसान हुआ है-
कोर्ट प्रमोशन पर क्या कहा?
- कोर्ट ने साफ किया कि नेशनल टाइम स्केल प्रमोशन नहीं दिया जा सकता.
- इसके साथ ही यह भी कहा कि रैंक प्रमोशन देना संभव नहीं है, क्योंकि इससे सशस्त्र बलों के कामकाज (functioning) पर असर पड़ेगा.
पेंशन पर राहत:
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला अधिकारियों को सेवा से रिहाई के समय उनके नेशनल रैंक के आधार पर बढ़ी हुई पेंशन (hiked pension) का लाभ मिलेगा.
कोर्ट के इस फैसले में एक तरफ जहां सशस्त्र बलों की संरचना और कार्यप्रणाली को ध्यान में रखा गया. वहीं दूसरी ओर महिला अधिकारियों को आर्थिक रूप से राहत देने का भी प्रयास किया गया है.















