नवरात्रि पर कन्या पूजन क्यों करते हैं?

नवरात्रि के नौ दिन देवी शक्ति की अराधना के लिए सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण समय होता है. इन नौ दिनों में माता रानी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा का महत्व है.लेकिन नौ कुमारी कन्याओं की पूजा के लिए नवरात्रि व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है.

नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि महत्वपूर्ण होती है. इन दिनों में हवन और नवरात्रि व्रत पारण के साथ ही कन्या पूजन का भी विधान है. अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसके बिना नवरात्रि व्रत नहीं खोला जाता है. शास्त्रों से लेकर श्रीमद् देवीभागवत में भी नवरात्रि की अष्टमी-नवमी पर 2-9 वर्ष की कुमारी कन्याओं की पूजा करना शुभ बताया गया है. नवरात्रि में छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है. आज भी कन्या पूजन की परंपरा को निभाया जाता है. लेकिन कई लोग इसके पीछे छिपे धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कारणों के बारे में नहीं जानते.

कन्याओं में देवी शक्ति का वास माना जाता है

हिंदू धर्म में छोटी कन्याओं (2-9 वर्ष) को पवित्रता, शक्ति और देवी ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं. मान्यता है कि, अलग-अलग वर्ष की कन्याओं में देवी के नौ रूपों का वास होता है. इसलिए अष्टमी या नवमी तिथि पर नौ कन्याओं को घर बुलाकर उनकी पूजा की जाती है, भोग खिलाया जाता है और उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है. 9 कन्याओं के साथ एक बालक (लंगूर) भी होता है.

मां दुर्गा के नौ स्वरूप यानी नवदुर्गा के प्रतीक रूप में कन्याओं की पूजा की जाती है. भक्त कन्याओं के चरण धोते हैं, उन्हें तिलक लगाते हैं और भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेते हैं. ऐसी मान्यता है कि, इससे देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं. साथ ही कन्या पूजन से घर पर सुख-समृद्धि का वास होता है.

पौराणिक मान्यता

धर्मग्रंथ और पुराणों के अनुसार, पृथ्वी पर जब-जब अधर्म और अत्याचार बढ़ा है तब देवी शक्ति ने अलग-अलग रूपों में अवतार लेकर असुरों का नाश किया. माना जाता है कि, छोटी कन्याओं में साक्षात देवी दुर्गा का वास होता है. इसलिए जब भी घर पर कन्या का जन्म होता है तो कहा जाता कि, देवी का घर पर आगमन हुआ है. नवरात्रि पर कन्या पूजन का अनुष्ठान इस पर भी जोर देता है कि, महिलाएं महामाया का प्रतीक हैं और समाज में सम्मान व पूजा की पात्र हैं.

कन्या पूजन के लाभ

  • कन्या पूजन की परंपरा सदियों से ही सनातन संस्कृति का हिस्सा है. यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि बेटियां देवी का रूप हैं और उनका सम्मान करना हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा.
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में कन्या पूजन करने से कई शुभ फल प्राप्त होते हैं और घर की नकारात्मकता दूर होकर सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.
  • कन्या पूजन के दौरान कंजकों के पैर धोना सिर्फ परंपरा मात्र नहीं है, बल्कि यह भक्ति, सेवा और विनम्रता का भी प्रतीक है. शास्त्रों के अनुसार, ‘या देवी सर्वभूतेषु…’ के आधार पर हर कन्या में देवी का वास माना जाता है. इसलिए उनके चरण धोना देवी पूजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

 

 

 

यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि भास्कर न्यूज़ किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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