सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के चेयरमैन ली जे-योंग ने सोमवार को नई दिल्ली में कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सेल्फी ली। प्रधानमंत्री की ओर से आयोजित दोपहर के भोज के दौरान उन्होंने कैमरे में यह पल कैद किया।यह भोज राष्ट्रपति जे-म्युंग की भारत की राजकीय यात्रा के अवसर पर आयोजित किया गया। इस तस्वीर के साथ ली जे-योंग ने बिना कुछ कहे एक मैसेज भी दे दिया। तस्वीर सैमसंग के नोएडा प्लांट में बने गैलेक्सी जेड फ्लिप 7 से ली गई। सेल्फी वाली यह तस्वीर चीन की बेचैनी बढ़ाएगी।
चीन की क्यों बढ़ेगी बेचैनी?
कई दशक तक चीन ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का हब रहा है। लेकिन, अब सैमसंग अपनी मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हिस्सा (खासतौर से स्मार्टफोन) भारत में शिफ्ट करने लगा है। नोएडा में उसकी मोबाइल फैक्ट्री इस बदलाव का प्रतीक है।
जब सैमसंग जैसी बड़ी कंपनी किसी देश में निवेश करती है तो उसके साथ हजारों वेंडर और सप्लायर भी आते हैं। इससे भारत में एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। यह चीन के प्रभुत्व को चुनौती देता है।
बदलते मॉडल से चीन को डर
- कोरोना महामारी और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव के बाद चीजें बदली हैं।
- ग्लोबल कंपनियां अब सिर्फ चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहती हैं।
- सैमसंग ने इस मामले में बहुत तेजी दिखाई है।
- 2026 तक के रुझान बताते हैं कि सैमसंग ने भारत की पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम का खूब फायदा उठाया है।
- पूरी दुनिया के लिए कंपनी भारत से एक्सपोर्ट कर रही है।
- चीन को डर है कि अगर यह मॉडल पूरी तरह सफल रहा तो अन्य कंपनियां भी इसी रास्ते पर चलेंगी।
भारत और कोरिया CEPA को करेंगे अपग्रेड
भारत और दक्षिण कोरिया सोमवार को अपने ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) को अपग्रेड करने के लिए बातचीत दोबारा शुरू करने पर सहमत हुए। दोनों देश व्यापार का विस्तार, सप्लाई चेन को मजबूत और अहम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ एक संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों देश लोकतंत्र, आपसी सम्मान और कानून के शासन जैसे मूल मूल्यों पर एकमत हैं। ये उनकी साझेदारी का आधार बने हुए हैं।
द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने का बड़ा टारगेट
दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी टारगेट तय किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस दौरे के दौरान उठाए गए कदम इस प्रगति को तेज करने में मदद करेंगे। आर्थिक जुड़ाव को बढ़ावा देने और निवेश के प्रवाह को आसान बनाने के लिए एक ‘भारत-कोरिया वित्तीय मंच’ भी शुरू किया गया।














