नई दिल्ली। लोकसभा में महिलाओं के आरक्षण संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक के असफल होने के बावजूद 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, आरक्षण लागू करने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
सभी दलों से चर्चा और मानसून सत्र में नया प्रयास संभव
सरकार अब सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा करने जा रही है। यदि जरूरी हुआ तो मानसून सत्र में इस संबंध में नया विधेयक भी पेश किया जा सकता है।131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के असफल होने के बावजूद केंद्रशासित प्रदेशों और परिसीमन प्रक्रिया से संबंधित दो अन्य विधेयक लोकसभा में अभी भी लंबित हैं। सरकार इन्हें किसी भी समय अपनी सुविधा के अनुसार मतदान के लिए पेश कर सकती है।
सरकार के पास अभी खुले कई विकल्प
विकल्प-1: परिसीमन के माध्यम से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। विपक्षी दल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, जो 131वें संशोधन विधेयक के खिलाफ मुख्य कारण भी था।
विकल्प-2: दूसरा विकल्प है कि कुल सीटों की संख्या 550 पर ही रखते हुए केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदल दी जाएं। इस विकल्प पर राजनीतिक सहमति बनाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
विकल्प-3: तीसरा विकल्प अनुच्छेद 334A में बदलाव करके आरक्षण को परिसीमन की शर्त से अलग करना है। इससे मौजूदा 543 सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है। वर्तमान में 2026 तक परिसीमन पर रोक है, जिसके बाद सरकार को इस पर नए सिरे से विचार करना होगा।इन विकल्पों के बीच केंद्र सरकार ने विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक रूप से आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान सरकार विपक्ष को घेरने के लिए विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रही है।
106वां संवैधानिक संशोधन कानून अभी भी लागू
सरकार ने गुरुवार रात को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 यानी 106वें संवैधानिक संशोधन को अधिसूचित कर दिया था। यह कानून पूरी तरह से लागू है।vइस कानून के तहत महिलाओं के आरक्षण को जनगणना पूरी होने और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया है। इसलिए 2029 के लोकसभा चुनाव में आरक्षण लागू करने की संभावना बनी हुई है।शुक्रवार को जो विधेयक असफल हुआ, वह 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रावधान करता था, ताकि महिलाओं के आरक्षण को आसानी से लागू किया जा सके।
हालांकि, इस विधेयक के असफल होने से मूल कानून में निर्धारित 33 प्रतिशत आरक्षण कोटा पर कोई असर नहीं पड़ा है। आरक्षण तभी लागू होगा जब जनगणना पूरी हो जाएगी और उसके आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।वर्तमान में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है, जिसके 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। यदि उसके तुरंत बाद परिसीमन आयोग गठित किया जाता है और काम पूरा होता है, तो महिलाओं का आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू किया जा सकता है।















