प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 और 8 नवंबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर रहेंगे। इस दो दिवसीय प्रवास के दौरान वह वाराणसी से खजुराहो के बीच चलने वाली नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का उद्घाटन करेंगे। यह ट्रेन पूर्वांचल और बुंदेलखंड के बीच तीव्र गति से यात्रा का एक नया अध्याय शुरू करेगी, जिससे धार्मिक और पर्यटन स्थलों के बीच संपर्क और सुगमता बढ़ेगी। पीएम मोदी शुक्रवार शाम करीब 5 बजे वाराणसी पहुंचेंगे। एयरपोर्ट से लेकर बरेका गेस्ट हाउस तक के मार्ग पर उनके स्वागत की जोरदार तैयारियां की जा रही हैं। जगह-जगह पर लोगों द्वारा पारंपरिक तरीकों से उनका स्वागत किया जाएगा और पूरे शहर को भगवा और तिरंगे रंगों से सजाया जा रहा है।
शनिवार सुबह प्रधानमंत्री वाराणसी से खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही तीन अन्य वंदे भारत ट्रेनों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया जाएगा। इस मौके पर रेलवे अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहेंगे। बताया जा रहा है कि यह ट्रेन उत्तर भारत के यात्रियों के लिए एक बड़ी सुविधा साबित होगी, क्योंकि इससे यात्रा समय में काफी कमी आएगी और क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
वाराणसी प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री कई विकास परियोजनाओं की समीक्षा भी करेंगे। इनमें वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम जैसे अहम प्रोजेक्ट शामिल हैं। रोपवे प्रोजेक्ट शहर में ट्रैफिक समस्या को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम वाराणसी को खेल के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा। प्रधानमंत्री परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट अधिकारियों से लेंगे और आवश्यक दिशा-निर्देश भी देंगे।
अपने दौरे में मोदी स्कूली बच्चों से संवाद करेंगे और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर क्षेत्र के विकास से जुड़ी बातों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा वे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से भी मुलाकात कर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा वाराणसी के विकास और जनता से जुड़ाव को और मजबूत करने वाला साबित होगा।वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत के साथ काशी से खजुराहो तक की दूरी अब कम समय में तय की जा सकेगी। यह ट्रेन न केवल धार्मिक यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी नई गति देगी। पीएम मोदी का यह दौरा विकास, संवाद और नई संभावनाओं का प्रतीक माना जा रहा है, जो काशी की प्रगति को और ऊंचाई पर ले जाएगा।















