मुजफ्फरनगर जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन ने कई परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। इस हादसे में 30 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इनमें मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों से प्रजापति समाज के छह लोग और कश्यप समाज के एक व्यक्ति शामिल हैं। इन परिवारों के हालात जानने और उन्हें हर संभव मदद पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप मुजफ्फरनगर पहुंचे। मंत्री ने मृतकों और घायलों के परिजनों से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और कड़े निर्देश देते हुए आर्थिक व चिकित्सकीय सहायता का आश्वासन दिया।मंत्री नरेंद्र कश्यप ने मृतक परिवारों को निजी स्तर से 50-50 हजार रुपये देने का ऐलान किया है। इसके अलावा उन्होंने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को निर्देश दिए कि साइन बोर्ड और राज्य आपदा समिति से 9 लाख रुपये की सहायता राशि मृतक परिवारों को तुरंत उपलब्ध कराई जाए। घायलों के बेहतर इलाज के लिए मंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मेडिकल कॉलेज अध्यक्ष गौरव स्वरूप को व्यक्तिगत रूप से निर्देशित किया है। उन्होंने पीड़ितों के उपचार में किसी भी प्रकार की देरी न होने की सख्त हिदायत दी।घायलों की स्थिति गंभीर होने पर नरेंद्र कश्यप ने एम्स ऋषिकेश को पत्र लिखकर प्लास्टिक सर्जरी और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को निजी और सरकारी दोनों स्तरों से हर संभव मदद दिलाई जाएगी। मंत्री ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर पीड़ित परिवारों से संपर्क बनाए रखने और उनकी जरूरतों के अनुसार सहायता देने के निर्देश भी दिए।जनपद दौरे के दौरान नरेंद्र कश्यप ने रामवीर, अंजलि, ममतेश, आकांक्षा, दीपेश, आनंद और कार्तिक कश्यप के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी बेहद दुखद है और सरकार व वे स्वयं, दोनों ही स्तरों से पीड़ित परिवारों को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी यदि किसी प्रकार की मदद की आवश्यकता होगी तो वे तत्पर रहेंगे।इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और किसी भी कीमत पर उन्हें असहाय नहीं छोड़ा जाएगा। मंत्री नरेंद्र कश्यप की व्यक्तिगत पहल ने हादसे से प्रभावित परिवारों को संबल देने का कार्य किया है। यह कदम न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता का भी परिचायक है।















