मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के प्रस्तावित चुनावों की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, प्रत्याशियों द्वारा जिले-जिले जाकर अधिवक्ताओं से समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में बार काउंसिल के एक प्रमुख प्रत्याशी और इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता इमरान उल्हा मुजफ्फरनगर कचहरी पहुंचे। यहां वरिष्ठ अधिवक्ता उस्मान सिद्दीकी व उनकी टीम ने उनका फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया। इसके बाद इमरान उल्हा ने अधिवक्ताओं के साथ संवाद स्थापित करते हुए अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की।
इमरान उल्हा ने कहा कि बार काउंसिल का चुनाव पूरी तरह रेगुलेटरी स्वरूप वाला है और इसकी मूल भावना अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। ऐसे में प्रत्येक अधिवक्ता का दायित्व है कि वह मतदान करते समय यह सुनिश्चित करे कि उसके द्वारा चुना जा रहा प्रत्याशी वास्तविक रूप से पेशे से अधिवक्ता हो, न कि ऐसा व्यक्ति जो केवल चुनावी फायदे के लिए अधिवक्ता की पहचान का उपयोग कर रहा हो। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल वही शक्ति है जो अधिवक्ताओं की एकता को मजबूत करती है और इस एकता का भविष्य विचारशील मतदान पर निर्भर करता है।
प्रत्याशी ने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे वोट डालने से पहले गहनता से जांच करें कि प्रत्याशी वास्तव में वकालत के पेशे से सक्रिय रूप से जुड़ा है या व्यवसाय, निर्माण या अन्य किसी क्षेत्र से संबद्ध व्यक्ति केवल चुनाव लड़ने के उद्देश्य से अधिवक्ता की पहचान का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव अधिवक्ता समुदाय की प्रतिष्ठा और गरिमा का विषय है, इसलिए वही व्यक्ति चुना जाए जो कोर्ट में पीड़ितों की लड़ाई लड़ रहा हो और अधिवक्ताओं की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने की क्षमता रखता हो।
मुजफ्फरनगर आगमन पर मिले गर्मजोशीपूर्ण स्वागत से उत्साहित इमरान उल्हा ने कहा कि यह शहर हमेशा से अधिवक्ताओं के सम्मान और संघर्ष को महत्व देता आया है। यहां मिला स्नेह उनके लिए प्रेरणादायी है और अधिवक्ताओं की एकजुटता का प्रतीक है। जब उनसे पूछा गया कि ऐसे कौन से प्रत्याशी हैं जो स्वयं पेशेवर अधिवक्ता नहीं हैं लेकिन चुनाव मैदान में हैं, तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव की गरिमा बनाए रखना और आपसी सम्मान को कायम रखना जरूरी है।
इमरान उल्हा ने पूर्व कार्यकारिणी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली कार्यकारिणी ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को प्रमुख मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा था, लेकिन आठ वर्षों के बाद भी इस दिशा में कोई सार्थक कदम नजर नहीं आया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि अधिवक्ता हित सर्वोपरि हैं, तो एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की दिशा में ठोस पहल अनिवार्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनाव जीतने के बाद अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी तथा बार काउंसिल को अधिवक्ता हितों की प्रहरी संस्था के रूप में प्रभावी ढंग से स्थापित किया जाएगा।















