मुजफ्फरनगर। जनपद की तितावी थाना पुलिस ने मानवता और कानून व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए 12 बंधक मजदूरों को मुक्त कराया है। इन मजदूरों को एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में कथित रूप से अमानवीय परिस्थितियों में बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था। पुलिस कार्रवाई के बाद मजदूरों को न केवल आजादी मिली, बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी प्राप्त हुआ। मामले की जानकारी सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में एसपी देहात अक्षय महाडिक, फुगाना क्षेत्राधिकारी विश्वजीत सिंह तथा तितावी थाना प्रभारी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री पर छापा मारा और सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला।
मुक्त कराए गए मजदूरों ने पुलिस को बताया कि वे पिछले करीब डेढ़ वर्ष से बंधक बनाकर रखे गए थे। इस दौरान उन्हें अपने परिवारों से संपर्क करने तक की अनुमति नहीं थी। कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें यह तक नहीं मालूम था कि उनके घरों में क्या स्थिति है और उनके परिजन किस हाल में हैं। मजदूरों के अनुसार उन्हें बेहद कम भोजन दिया जाता था। दिनभर कठिन परिश्रम कराने के बावजूद केवल दो रोटियों के सहारे गुजारा करने को मजबूर किया जाता था।
पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि काम में कमी होने या विरोध करने पर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी। उन्हें डंडों और कोड़ों से पीटा जाता था तथा कई बार पेचकस जैसी नुकीली वस्तुओं से भी प्रताड़ित किया जाता था। मजदूरों का कहना है कि भय का माहौल बनाए रखने के लिए आरोपियों द्वारा अवैध तमंचे से फायरिंग कर उन्हें डराया-धमकाया जाता था, जिससे वे भागने या किसी से मदद मांगने का साहस न कर सकें।
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और उन्हें जेल भेज दिया गया है। मुक्त कराए गए मजदूरों ने पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो उन्हें नया जीवन मिल गया हो। पुलिस अधिकारियों ने सभी मजदूरों का सम्मान करते हुए उन्हें मालाएं पहनाईं और सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया। इस कार्रवाई की जनपद भर में सराहना हो रही है और इसे मानव तस्करी तथा बंधुआ मजदूरी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।















