महादेव मंदिर में शिव विवाह की कथा, शिव पुराण से मिला जीवन का संदेश

राजगढ़ (अलवर)। राजगढ़ पंचायत समिति के सकट क्षेत्र के मुर्राटा गांव स्थित जोगियों की ढाणी के महादेव मंदिर परिसर में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का आयोजन जारी है। कथा के तीसरे दिन शिव विवाह प्रसंग की कथा सुनाई गई, जिसमें भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कथा वाचक आचार्य योगी कमलेश नाथ ने श्रद्धालुओं को बताया कि आत्मा का परमात्मा से मिलन ही शिव में लीन हो जाना है। उन्होंने कहा कि शंकर को वैराग्य का प्रतीक माना गया है, लेकिन उन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाकर संसार को यह सिखाया कि गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भी वैराग्य का पालन किया जा सकता है।

कथा के दौरान शिव परिवार की विविधताओं और उनके प्रतीकों का भी उल्लेख किया गया। वाचक ने कहा कि भगवान का वाहन नंदी बैल है, माता पार्वती का वाहन शेर, गणेश का मूषक और कार्तिकेय का वाहन मोर है। ये सभी वाहन और उनके स्वामी अलग-अलग प्रकृति और विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बावजूद एक ही परिवार में इनका सामंजस्य यह दर्शाता है कि विविधताओं के बीच भी संतुलन और प्रेम से जीवन जिया जा सकता है। यही गूढ़ संदेश शिव पुराण के माध्यम से मिलता है।

विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए वाचक ने कहा कि माता पार्वती ने हिमालय और मैनादेवी के घर जन्म लिया। उन्होंने तपस्या के माध्यम से शिव को पाने के लिए कठिन साधना की। उसी समय ताड़कासुर नामक राक्षस का आतंक फैल रहा था, जिससे देवता भी भयभीत थे। उसके संहार के लिए शिव का विवाह आवश्यक था, तब जाकर शिव की समाधि टूटी और विवाह संपन्न हुआ।

यह धार्मिक आयोजन 7 अगस्त तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से सायं 4 बजे तक जारी रहेगा। ग्रामीण श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार अंतिम दिन भंडारे और हवन के साथ कथा का समापन किया जाएगा।

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