21 लाख साल नहीं, करोड़ों साल पुरानी है ‘किसिंग’ की कहानी: इंसानों ने प्रकृति से सीखा प्यार जताने का तरीका

इंसानों में किस यानी चुंबन को प्यार और भावनाओं की सबसे खास अभिव्यक्ति माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस करने की यह आदत केवल इंसानों में नहीं पाई जाती? एक नए शोध ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है कि किस इंसानी संस्कृति की देन है. वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि किस का इतिहास इंसानों के धरती पर आने से करोड़ों साल पुराना है. शोध के अनुसार पहला ‘किस जैसा व्यवहार’ 16.9 से 21.5 मिलियन वर्ष यानी लगभग 1.7 से 2.1 करोड़ साल पहले अफ्रीका के घने जंगलों में देखा गया था, जब आधुनिक मनुष्यों के पूर्वज भी अस्तित्व में नहीं थे।

वैज्ञानिकों का कहना है कि किस इंसानों ने प्रकृति से ही सीखा. जानवरों की कई प्रजातियाँ अपने साथी, बच्चों या समूह के अन्य सदस्यों के साथ चेहरा छूने, मुंह लगाने और होंठों को हल्के से स्पर्श करने जैसे व्यवहार करती हैं. यह सब किस की शुरुआती और प्राकृतिक रूप है. शोधकर्ताओं ने बताया कि आज भी दुनिया में चींटियाँ, पक्षी, भालू, चिंपैंजी, बोनोबो और कई अन्य प्रजातियाँ एक-दूसरे को मुंह से छूकर या भोजन साझा कर प्यार जताती हैं. इससे स्पष्ट होता है कि किस करना किसी सभ्यता, संस्कृति या समाज द्वारा गढ़ी गई परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति में बहुत पुराना व्यवहार है।

अफ्रीका के जंगलों में रहने वाले प्राइमेट्स यानी इंसानों जैसे दिखने वाले जीव सबसे पहले किस जैसे व्यवहार करते थे. वे अपने साथी के मुंह को हल्के से स्पर्श कर विश्वास, आकर्षण और स्नेह व्यक्त करते थे. शोध में पाया गया कि इससे न केवल रिश्ते मजबूत होते थे, बल्कि समूह में सामंजस्य बनाए रखने में भी मदद मिलती थी. धीरे-धीरे यह व्यवहार उनकी अगली पीढ़ियों में भी शामिल हो गया.

समय बीतने के साथ जब इंसानों के पूर्वज विकसित हुए और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैले, तो वे भी इसी प्राकृतिक प्रथा को अपने साथ ले गए. यही कारण है कि किस करने की परंपरा दुनिया की कई संस्कृतियों में अलग-अलग रूपों में देखने को मिलती है. कहीं यह प्रेम का इज़हार है, कहीं अभिवादन का तरीका, तो कहीं सम्मान देने की परंपरा. शोधकर्ता मानते हैं कि किस ने इंसानी रिश्तों को समझने, जोड़ने और भावनाएँ व्यक्त करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि किस करना सिर्फ रोमांटिक संबंधों तक सीमित नहीं था. प्राइमेट्स में किस जैसे व्यवहार से तनाव कम होता था, डर खत्म होता था और समूह में विश्वास बढ़ता था. आज भी चिंपैंजी किसी झगड़े के बाद एक-दूसरे को मुंह से छूकर मनाते हैं. यह दिखाता है कि किस रिश्तों को सुधारने और मजबूत बनाने का बहुत पुराना, प्राकृतिक तरीका है।

अंत में, वैज्ञानिक स्पष्ट रूप से बताते हैं कि इंसानों ने किस की आदत किसी खास संस्कृति या समाज से नहीं, बल्कि प्रकृति और अपने पशु पूर्वजों से सीखी. यानी प्यार जताने का यह सबसे सुंदर तरीका इंसानी नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत है, जो लाखों नहीं बल्कि करोड़ों वर्ष पुरानी है।

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