दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है, जहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि तीमारदारों को पीने तक का पानी मयस्सर नहीं हो रहा। कई अस्पतालों में वॉटर कूलर या तो खराब पड़े हैं या खाली हैं। मरीजों के परिजनों को इधर-उधर भटकना पड़ता है, जिससे उनकी तकलीफें और बढ़ जाती हैं। सरकार द्वारा किए गए दावों और जमीनी सच्चाई के बीच भारी फासला साफ नजर आता है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि आम जनता की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी को भी सामने लाती है।















