मुजफ्फरनगर में शिव शक्ति महायज्ञ का भव्य शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था

मुजफ्फरनगर। नगर में एकादश कुण्डीय शिव शक्ति महायज्ञ का शुभारंभ अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति के संगम के साथ हुआ। यह महायज्ञ आयोजन समिति के तत्वावधान में जारी रहेगा। महायज्ञ की शुरुआत से पूर्व मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा के दौरान पूरे नगर का वातावरण भक्तिभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया, जिससे नगर का प्रत्येक क्षेत्र धार्मिक उल्लास और सांस्कृतिक छटा से जगमगाता दिखा। रास्ते में श्रद्धालुओं का स्वागत पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ किया गया। आयोजन समिति ने आए हुए अतिथियों और भक्तों का विशेष सत्कार किया तथा उन्हें महायज्ञ के महत्व और पारंपरिक रीतिरिवाजों के बारे में अवगत कराया।नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और परंपरागत विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनके माध्यम से युवा और बच्चे अपनी संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़ते हैं।कलश यात्रा में पूर्व विधायक अशोक कंसल, भाजपा नेता गौरव स्वरूप, उद्यमी भीमसेन कंसल, राकेश बिंदल, व्यापारी नेता संजय मित्तल, सोम प्रकाश कुच्छल, हरिशंकर तायल, कुलदीप कुमार, विनोद राठी, रजत राठी, रजत गोयल और नितिन संगल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने उत्साहपूर्वक यात्रा में भाग लेकर महायज्ञ की भव्यता को और बढ़ाया।आयोजन के दौरान भक्ति गीतों और मंत्रोच्चारण ने माहौल को और भी पवित्र बना दिया। श्रद्धालुओं ने यात्रा के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया और प्रसाद ग्रहण कर अपनी आस्था व्यक्त की। यह महायज्ञ नगरवासियों के बीच आपसी सौहार्द और धार्मिक सहिष्णुता का संदेश भी साझा करता दिखा।कुल मिलाकर यह भव्य धार्मिक आयोजन नगरवासियों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत बना। महायज्ञ की भव्यता और कलश यात्रा की शोभा ने पूरे नगर में उत्सव का माहौल उत्पन्न कर दिया। नगरवासियों और श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन में धार्मिक अनुशासन, समाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक माना। इस प्रकार, यह महायज्ञ केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी नगर में भाईचारे और एकजुटता का संदेश फैलाता है।

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