बंगाल में सियासी हलचल तेज, तृणमूल-कांग्रेस के बीच पाला बदल का खेल शुरू.

पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश में पाला बदल का खेल शुरू हो चुका है, जिसमें प्रमुख दल एक-दूसरे के नेताओं को अपनी ओर खींचने में लगे हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक शंकर मालाकार ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है, जिससे पार्टी को उत्तरी बंगाल में मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस को उसी की चाल में मात देने की कोशिश की है। अधीर ने मुर्शिदाबाद में तृणमूल के कई नेताओं को कांग्रेस में शामिल करवा कर राजनीतिक संतुलन को चुनौती दी है। दोनों दलों के बीच यह सियासी खींचतान आने वाले चुनावों में दिलचस्प मुकाबले की ओर इशारा करती है।

उत्तर बंगाल में कांग्रेस के हैवीवेट नेता तृणमूल में शामिल

शंकर मालाकार 2011 से 2021 तक माटीगाड़ा नक्सलबाड़ी के विधायक थे. वे करीब 20 साल तक जिला कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस के भीतर उनकी संगठनात्मक शक्ति पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता. शंकर मालाकार का कांग्रेस छोड़ना चुनाव से पहले अधीर चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर के लिए एक बड़ा ‘झटका’ माना जा रहा है.शंकर मालाकार के टीएमसी में शामिल होने पर सुब्रत बख्शी ने कहा कि इससे न सिर्फ तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ऑक्सीजन मिलेगी, बल्कि पार्टी की ताकत भी बढ़ेगी. सुब्रत बख्शी ने कहा, “वह 15 वर्षों तक दार्जिलिंग जिले के जिला अध्यक्ष रहे. उनके शामिल होने से जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत होगा.”अरूप बिस्वास का कहना है कि पार्टी नेता के निर्देश पर उन्होंने शंकर मालाकार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल किया था. दूसरी ओर, शंकर ने तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर अकेले ही भाजपा का मुकाबला किया. उनका कहना है कि भाजपा उत्तर बंगाल में उत्पात मचा रही है. कभी वे कामतापुरी, गोरखालैंड, तो कभी उत्तर बंगाल को बांटना चाहते हैं. कांग्रेस के अंदर रहकर भाजपा से लड़ना संभव नहीं है. इसलिए वह टीएमसी में शामिल हुए हैं.

अधीर ने मुर्शिदाबाद में तृणमूल में लगाई सेंध

दूसरी ओर, मुर्शिदाबाद में अधीर चौधरी लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. बुधवार को कार्तिक साहा सहित पचास से अधिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ तृणमूल छोड़कर कांग्रेस में लौट आए. कार्तिक बुधवार दोपहर मुर्शिदाबाद के बरहामपुर स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी का हाथ थामकर कांग्रेस में वापस लौट आए.कार्तिक साहा पहले कांग्रेस में थे, लेकिन 2022 में वह कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में शामिल हो गए थे पार्टी बदलने से पहले वह शहर कांग्रेस के अध्यक्ष थे. हालांकि, तृणमूल में शामिल होने के बाद भी उन्हें पदोन्नति दी गई. उन्हें शहर तृणमूल का उपाध्यक्ष पद दिया गया. जिले के राजनीतिक हलकों में कार्तिक के अधीर का हाथ थामकर कांग्रेस में वापसी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. कार्तिक का कहना है कि 2022 में नगर निगम बोर्ड के कार्यभार संभालने के बाद से उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। इसलिए घर वापस लौट आए हैं.

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