भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में दिल्ली परिवहन निगम (DTC) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP) के शासनकाल में डीटीसी को भारी नुकसान हुआ है और बसों की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। 2018-19 में डीटीसी के पास कुल 3,882 बसें थीं, जो 2022-23 तक घटकर केवल 3,476 रह गईं, यानी चार वर्षों में 400 से अधिक बसें कम हो गईं। इतना ही नहीं, वित्तीय घाटे की बात करें तो 2018-19 में जहां डीटीसी का घाटा ₹1,750 करोड़ था, वह 2022-23 में बढ़कर ₹2,350 करोड़ तक पहुंच गया। सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया है कि डीटीसी की बसों की औसत उम्र बढ़ रही है, जिससे उनकी मेंटेनेंस लागत भी बढ़ रही है। वहीं, किराए से होने वाली आय भी लागत की तुलना में कम होती जा रही है, जिससे डीटीसी की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बसों की संख्या में बढ़ोतरी, कुशल प्रबंधन और नई तकनीकों को अपनाकर डीटीसी को फिर से लाभ की स्थिति में लाया जा सकता है। यह रिपोर्ट दिल्ली की परिवहन व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।















