मालाखेड़ा कस्बे में इन दिनों आवारा स्वानों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि अब तक करीब 50 से अधिक लोग इन स्वानों के हमले का शिकार हो चुके हैं। कस्बे में लगातार हो रही इन घटनाओं से लोगों में दहशत का माहौल है, लेकिन इसके बावजूद नगर पालिका क्षेत्र के अधिकारी और कर्मचारी गंभीर लापरवाही बरतते दिख रहे हैं। न्यायालय के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद आवारा स्वानों को पकड़ने और कस्बे को सुरक्षित बनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इसी कारण आए दिन लोग डॉग बाइट की घटना का सामना कर रहे हैं और अस्पतालों में भीड़ बढ़ती जा रही है।
शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालाखेड़ा में भी डॉग बाइट के मरीजों की संख्या असामान्य रूप से बढ़ गई। आउटडोर में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर रतनलाल मीणा, डॉक्टर कैलाश चंद सैनी और इमरजेंसी कंपाउंड स्टाफ की टीम को लगातार मरीजों का उपचार करना पड़ा। डॉक्टरों ने बताया कि बालक, महिलाएं, युवक और बुजुर्ग बड़ी संख्या में डॉग बाइट की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचे। इनमें से कई मरीजों को गहरे घाव आए थे, जिनकी तत्काल मलहम-पट्टी की गई और एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार करीब 30 से अधिक लोगों को निशुल्क एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई गई।
कस्बे के रहने वाले सतीश कुमार, केदारचंद और जगदीश प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में दबाव बढ़ने और भीड़ अधिक होने के कारण कई लोगों को मजबूरी में मेडिकल स्टोर से ही एंटी रेबीज वैक्सीन खरीदकर लगवाना पड़ा। सुरक्षा कंपनी की वैक्सीन की कीमत लगभग 320 रुपये बताई गई, जिसे वह अपनी जेब से खरीदने को मजबूर हुए। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते आवारा स्वानों को पकड़ने की व्यवस्था करता, तो इतने लोग घायल नहीं होते और उन्हें निजी खर्च पर इंजेक्शन नहीं लगवाने पड़ते।
स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि कस्बे में तत्काल स्वान पकड़ने की टीम तैनात की जाए और आवारा कुत्तों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। बढ़ते हमलों को देखते हुए कस्बेवासियों में दहशत फैल चुकी है, और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
















