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मुजफ्फरनगर | शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। जिला अस्पताल में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के बारे में जानकारी दी गई और उन्हें अवसाद, नशे, और आत्महत्या जैसी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत क्लिनिकल फिजिक्लोजिस्ट अंशिका मलिक ने की और इसका संचालन साईकोथेरेपिस्ट मनोज कुमार ने किया। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर प्रकाश डालते हुए मनोचिकित्सक डॉ. अर्पण जैन, साईकोथेरेपिस्ट मनोज कुमार, और कम्यूनिटी नर्स कपिल आत्रेय ने भी महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने बताया कि शिक्षकों को मानसिक रोगों के बारे में प्रशिक्षण देकर उन्हें कक्षाओं में उन बच्चों तक पहुंचने की जिम्मेदारी दी गई है जो अवसाद या अन्य मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके लिए “मनदूत-मनपरी” नामक कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसमें 20 शिक्षकों को चुनकर उन्हें विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। ये “मनदूत-मनपरी” ऐसे बच्चों से बात करेंगे जो अपने मानसिक समस्याओं को सीधे शिक्षक से नहीं कह पाते, और उन्हें जिला अस्पताल के मन कक्ष में भेजेंगे ताकि उनकी काउंसलिंग और इलाज किया जा सके।साईकोथेरेपिस्ट मनोज कुमार ने बताया कि माता-पिता के बाद शिक्षक बच्चे के सबसे करीबी होते हैं, इसलिए उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के प्रति जागरूक करना और ऐसे बच्चों की पहचान करना महत्वपूर्ण है।स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस पहल से यह उम्मीद है कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ेगी और बच्चों को समय पर उचित मदद मिल सकेगी।
















