महंगा हुआ तारकोल, मुश्किल में सड़क निर्माण.

पश्चिम एशिया संकट के भारत के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र पर असर को लेकर संसदीय समिति ने  बैठक बुलाई है. इस बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को बुलाया गया है. पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत में तारकोल (बिटुमेन) का संकट हो रहा है. इसके कारण सड़कों के निर्माण और रखरखाव के काम में बाधा आ रही है. ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर मामलों की संसदीय समिति इस पर चर्चा करेगी.युद्ध के कारण वीजी-40 ग्रेड के तारकोल की कीमत करीब दोगुनी हो गई. जबकि सिर्फ हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए 15 जुलाई तक लगभग छह लाख टन की अनुमानित जरूरत के मुकाबले इसकी उपलब्धता बहुत कम हो गई है.भारत में सबसे अधिक इसी का प्रयोग होता है. इस कारण सड़क निर्माण के लक्ष्य पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. भारत वैकल्पिक आपूर्ति के रास्तों की तलाश कर रहा है.

बिटुमेन की कमी से हाईवे प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी

रिपोर्ट के अनुसार रूस से तेल आयात होने की वजह से देश में कच्चे तेल की उपलब्धता ठीक-ठाक बनी हुई है, लेकिन इससे बिटुमेन की सप्लाई में कोई सुधार नहीं हुआ है. रूस से आने वाला स्वीट क्रूड ऑयल भारतीय मौसम के लिए सही बिटुमेन ग्रेड नहीं बना सकता. रूसी तेल में सल्फर बहुत कम होता है, जिससे बिना खास प्रोसेसिंग के VG-10 या VG-30 जैसे कम ग्रेड के बिटुमेन बनते हैं.सूत्रों का कहना है कि VG-40 उस क्रूड ऑयल से बनता है जो हमें पश्चिम एशियाई देशों से मिलता है और ज्यादातर तैयार प्रोडक्ट भी इन्हीं देशों से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आयात किए जाते थे. इस लड़ाई से इस सप्लाई पर असर पड़ा है और इसका असर हाईवे के मेंटेनेंस और कंस्ट्रक्शन पर भी पड़ रहा है.

बिटुमेन की कमी ने बढ़ाई सरकार की चिंता

यह मुद्दा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई इनफॉर्मल ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (iGoM) की पिछली मीटिंग में भी उठाया गया था, जिसमें बताया गया था कि कैसे जरूरी क्वालिटी के बिटुमेन की कमी ने अप्रैल में हाईवे कंस्ट्रक्शन की रफ्तार को एक-चौथाई तक कम कर दिया है.अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण, नगर निगम और राज्य की सड़कों के मामले में भी असर एक जैसा है. उनका कहना है कि कीमतें और बढ़ रही हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम ज्यादा कीमत पर भी अपना काम पूरा करने के लिए बिटुमेन कैसे पाएं.

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