नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में “कॉकरोच जनता पार्टी” के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उस समय दिलचस्प माहौल बन गया, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को संयम बरतने और अत्यधिक भावुक न होने की सलाह दी। अदालत में हुई इस टिप्पणी के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया। याचिका में पार्टी के नाम, उसकी गतिविधियों और कथित तौर पर समाज में भ्रम फैलाने वाले बयानों पर आपत्ति जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि इस संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और इसके पंजीकरण को निरस्त करने के निर्देश दिए जाएं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने भावुक अंदाज में अपनी दलीलें रखीं और कहा कि इस प्रकार के नाम और गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा सामाजिक मर्यादा के खिलाफ हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का नाम आम लोगों की भावनाओं को आहत करता है और इससे राजनीतिक व्यवस्था का मजाक बन रहा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अदालत तथ्यों और कानून के आधार पर फैसले करती है, इसलिए याचिकाकर्ता को इतना भावुक होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने शांत स्वर में कहा कि न्यायालय हर मामले को संवैधानिक दायरे में देखकर निर्णय लेता है और केवल भावनाओं के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक संगठन के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसके कानूनी पहलुओं की गहराई से जांच जरूरी होती है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि उनके पास ठोस साक्ष्य और कानूनी आधार हैं तो उन्हें व्यवस्थित तरीके से अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण अधिकार है, हालांकि उसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।मामले की अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय की जाएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने अदालत में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया।























































