नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई की, जिसमें फैसला सुरक्षित रखा गया है। इसके बीच, केजरीवाल ने यह दावा किया कि अंतरिम जमानत पर रिहा होने के बावजूद उन्हें किसी भी आधिकारिक काम में हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए। वकीलों के तर्कों और ईडी की आपत्ति के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की। इसके साथ ही, कोर्ट ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को बचाने के लिए कहा और इसे अपवाद नहीं बनाया। इस दौरान केजरीवाल को सार्वजनिक परिस्थितियों के आधार पर आदतन अपराधी नहीं ठहराया गया। इस समीक्षा में, जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांक दत्ता की बेंच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फिर, वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को इस बात की सुनिश्चित किया कि वो किसी भी अधिकृत फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। हालांकि ईडी ने अंतरिम राहत का विरोध करते हुए कहा कि राजनेताओं को एक वर्ग से अलग नहीं माना जा सकता और केजरीवाल के मामले को आम आदमी के मामले के समान ही माना जाना चाहिए।इस बीच उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जनता के मतों के द्वारा चुनकर आए हैं और केस में आगे कोर्ट ने फिर टिप्पणी करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल कोई आदतन अपराधी नहीं है’। दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय ने जिरह करते हुए कहा कि इस केस को अपवाद न बनाएं।
ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी रिट याचिका 9
अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद केजरीवाल ने इस साल अप्रैल में SC में याचिका दायर की थी। उनकी याचिका पर 15 अप्रैल को नोटिस जारी किया गया, साथ ही मामले को 29 अप्रैल से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया। फिर, 6 मई को सुनवाई की तारीख रखी गई।
दिल्ली की कोर्ट ने आबकारी घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 20 मई तक बढ़ाई। कोर्ट ने ये भी कहा कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं, वहां चुनाव हैं और यहां असाधारण परिस्थितियां। साथ ही ये भी कहा कि अरविंद कोई आदतन अपराधी नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली सीएम अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई की। गौरतलब है कि 21 मार्च की गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत तिहाड़ जेल में बंद हैं। शीर्ष अदालत ने 15 अप्रैल को ईडी को नोटिस जारी किया और केजरीवाल की याचिका पर उससे जवाब मांगा।
दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अरविंद केजरीवाल 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान 7 सितारा ग्रैंड हयात होटल में रुके थे और इसके बिल का भुगतान चनप्रीत सिंह नाम के व्यक्ति ने किया था, जिन्होंने कथित तौर पर आप के अभियान के लिए नकद धनराशि स्वीकार की थी
















