मुजफ्फरनगर में देश के अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद चौक का नाम बदलकर अटल चौक किए जाने को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता साजिद हसन ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे न केवल शहीद वीर अब्दुल हमीद का अपमान बताया, बल्कि देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले सैनिकों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की मानसिकता अब इस हद तक पहुंच गई है कि वह देश की रक्षा में शहादत देने वालों का भी धर्म देखकर उनका सम्मान तय करने लगी है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
साजिद हसन ने कहा कि नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर द्वारा वर्ष 1996 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर खालापार क्षेत्र में मीनाक्षी सिनेमा के निकट स्थित चौराहे का नाम देश के वीर सपूत अब्दुल हमीद के नाम पर रखा गया था। यह नामकरण इसलिए किया गया था ताकि आने वाली पीढ़ियां उस सैनिक के बलिदान को याद रख सकें, जिसने 1965 के युद्ध में अपनी वीरता से पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिए थे और अंततः मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद देश के उन गिने-चुने सैनिकों में से थे, जिन्होंने असाधारण साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के टैंकों को नष्ट किया और भारत की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। ऐसे वीर के नाम से जुड़े चौक का नाम बदलना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि शहीदों की भावना और उनके परिवारों के सम्मान पर सीधा प्रहार है। साजिद हसन ने आरोप लगाया कि नगर पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप द्वारा यह कदम उठाकर देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों के साथ भेदभाव किया गया है।
सपा नेता ने यह सवाल भी उठाया कि यदि नगर पालिका में सहमति से वीर अब्दुल हमीद चौक का नाम बदलकर अटल चौक किया गया है, तो मुस्लिम और सेकुलर सोच रखने वाले सभासद इस मुद्दे पर चुप क्यों रहे। उन्होंने कहा कि यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और यह दर्शाती है कि या तो दबाव में आकर फैसला लिया गया या फिर शहीदों के सम्मान को नजरअंदाज किया गया।
साजिद हसन ने चेतावनी देते हुए कहा कि देश के लिए अपनी जान देने वाले वीर अब्दुल हमीद चौक का नाम बदलने और सैनिकों के साथ धर्म के आधार पर अपमान किए जाने के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी और सेकुलर सोच रखने वाले लोग इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे और शहीदों के सम्मान की लड़ाई सड़क से लेकर हर मंच पर लड़ी जाएगी।















