मुजफ्फरनगर। श्री राम कॉलेज ऑफ लॉ, मुजफ्फरनगर में पुलिस प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में “नये कानून–नया भारत” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसपी क्राइम श्रीमती इन्दु सिद्धार्थ उपस्थित रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में चौ. हरचन्द सिंह कॉलेज ऑफ लॉ के प्राचार्य डॉ. रविन्द्र प्रताप सिंह शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीपप्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर कॉलेज की प्रवक्ता एवं कार्यक्रम संयोजक आंचल अग्रवाल ने कहा कि पुराने कानून ब्रिटिश शासन की सुविधा के लिए बनाए गए थे, जबकि अब 5जी के युग में तकनीक और अपराध दोनों बदल रहे हैं, इसलिए न्याय व्यवस्था में भी सुधार आवश्यक है।कार्यक्रम के दौरान विधि के विद्यार्थियों ने भाषण, वाद-विवाद और प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता के माध्यम से अपने विचार रखे। एलएलबी द्वितीय वर्ष की छात्रा श्रेया राजपूत ने कहा कि “कानून सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के हर कदम पर हमारे साथ है।” वहीं बीएएलएलबी की छात्रा खुशी गहलोत ने कहा कि “पहले अपराध राज्य और अपराधी के बीच होता था, अब पीड़ित को न्याय प्रणाली में सक्रिय भूमिका दी गई है।
”छात्र-छात्राओं हिना आमिर, अरीबा आमिर, अक्षिता वर्णवाल, अकबर रेहान, अयान त्यागी, वंश वर्धन, सानिया शमशेर, अमन नईम और हुरैन खान ने विषय के पक्ष और विपक्ष में प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किए।इस अवसर पर प्रवक्ताओं विश्वेन्द्र पंवार और आशीष कुमार ने नये कानूनों की उपयोगिता और उनके व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की। प्राचार्या डॉ. पूनम शर्मा ने कहा कि “पहले आम नागरिक कानून से डरता था, लेकिन अब नया कानून जनता के लिए है और न्याय को सुलभ बनाता है।”मुख्य अतिथि इन्दु सिद्धार्थ ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में बनाए गए नये कानून व्यक्ति केंद्रित हैं। इन कानूनों में उन अपराधों को भी स्थान दिया गया है जिन्हें ब्रिटिश कालीन कानूनों में नजरअंदाज किया गया था। उन्होंने बताया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, त्वरित न्याय और डिजिटल सुविधा को नए कानूनों में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अब एफआईआर ऑनलाइन किसी भी स्थान से दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन नंबरों की उपयोगिता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।कार्यक्रम के सफल संचालन में संजीव कुमार, सोनिया गौड़, आंचल अग्रवाल, रितु धीमान, आक्षी कश्यप, मिनी सिंघल, विश्वेन्द्र पंवार, आशीष कुमार, डॉ. नाहिद अंजुम, विनय तिवारी और त्रिलोकचंद का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन प्राचार्या डॉ. पूनम शर्मा द्वारा सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया।
















