मुजफ्फरनगर। जिला महिला चिकित्सालय मुजफ्फरनगर में नवजात शिशु सुरक्षा सप्ताह 2025 के उपलक्ष्य में विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका जिला महिला चिकित्सालय, मुमू नगर ने की। इस अवसर पर चिकित्सा विशेषज्ञों, स्वास्थ्यकर्मियों, नर्सिंग स्टाफ और समुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, उनके जीवन के प्रारंभिक चरण में होने वाले खतरों की पहचान और समय पर उपचार की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम के दौरान एसएनसीयू नोडल अधिकारी डॉ अनुज राजवंशी ने नवजात शिशुओं में दिखाई देने वाले खतरनाक लक्षणों पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतवर्ष में नवजात शिशुओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में जन्म के समय एसफिक्सिया, सेप्सिस और हाइपोथर्मिया शामिल हैं। डॉ राजवंशी ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को उचित देखभाल, साफ-सफाई और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप न मिलने पर ये स्थितियां गंभीर रूप ले सकती हैं। इसलिए परिवारों, स्वास्थ्यकर्मियों और समुदाय को इन लक्षणों की समय रहते पहचान बेहद जरूरी है।उन्होंने समझाया कि एसफिक्सिया यानी जन्म के समय श्वास न आने की स्थिति नवजातों में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। ऐसे मामलों में डिलीवरी के दौरान प्रशिक्षित स्टाफ का होना और तुरंत पुनर्जीवन प्रक्रिया अपनाना शिशु के जीवन को सुरक्षित कर सकता है। इसके अतिरिक्त सेप्सिस, जो संक्रमण के कारण होता है, नवजातों के लिए अत्यंत खतरनाक होता है। डॉ राजवंशी ने बताया कि अस्वच्छ वातावरण, गंदे हाथ, संक्रमित उपकरण और जन्म के बाद शिशु की खराब साफ-सफाई से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस अवसर पर उन्होंने नवजात को छूने से पहले हाथ धोने, साफ कपड़े उपयोग करने और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
गोष्ठी में हाइपोथर्मिया यानी शरीर के तापमान में कमी की समस्या को भी गंभीर खतरों में शामिल किया गया। डॉ राजवंशी ने बताया कि ठंडे वातावरण, गीले कपड़े, या जन्म के बाद तुरंत उचित तापमान नियंत्रण न करने से नवजात का तापमान तेजी से गिर सकता है, जो उसके लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है। उन्होंने जन्म के तुरंत बाद शिशु को त्वचा से त्वचा संपर्क (कंगारू मदर केयर), गर्म कपड़े और उचित वार्मर का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ये छोटे-छोटे कदम नवजात के जीवन को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका ने स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित किया कि वे गांवों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाएं ताकि हर माता-पिता नवजात देखभाल के महत्व को समझ सकें। उन्होंने कहा कि नवजात शिशु सुरक्षा सप्ताह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज को स्वस्थ भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। गोष्ठी के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नवजात सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों को आम जनता तक पहुंचाने का संकल्प लिया।















