मुजफ्फरनगर महाविद्यालय में स्वरोजगार मेला आयोजित, छात्रों की प्रतिभा और नवाचार ने किया सबको प्रभावित.

मुजफ्फरनगर। महाविद्यालय परिसर में एक भव्य स्वरोजगार मेले का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन महाविद्यालय के सचिव अखिलेश दत्त एवं प्राचार्य प्रोफेसर सुधीर कुमार पुण्डीर द्वारा रिबन काटकर किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और पारंपरिक भारतीय कला-संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम का सफल संयोजन भारतीय भाषा, संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ की समन्वयिका प्रो. शुचि अग्रवाल ने किया, जबकि कौशल विकास प्रकोष्ठ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीयूष शर्मा ने सह-संयोजक की भूमिका निभाई।

कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षकों और विद्यार्थियों की टीम ने अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया। टीम में डॉ. बसंत कुमार, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. सुबोध कुमार, डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र, डॉ. खुशबू यादव, डॉ. निशा चौहान, डॉ. नेहा कनौजिया, डॉ. सौरभ गोयल, डॉ. भूपेश जांगिड़, एनसीसी के लेफ्टिनेंट अजय, नौशीन फातिमा, मीनाक्षी, प्रीती, पायल सैनी और एसएफसी होम साइंस विभाग के सदस्यों का सहयोग उल्लेखनीय रहा। सभी के समर्पण और सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन बेहद सफल और प्रेरणादायक बना।

मेले में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए घरेलू स्व-उत्पादों के अनेक स्टॉल लगाए। इन स्टॉलों पर विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इनमें हस्तकला पेंटिंग, देशी अचार, ग्रामीण हस्तकला पर आधारित सजावटी वस्तुएं, स्वनिर्मित फूलदान, रंगोली, चटाई, पाँवदान, रत्न-आभूषण आदि शामिल थे। प्रत्येक स्टॉल विद्यार्थियों की मेहनत, कौशल और आत्मविश्वास का प्रतीक दिखाई दिया।

इसके अलावा, छात्रों ने खानपान से जुड़ी अपनी रचनात्मकता भी प्रदर्शित की। उन्होंने भेलपुरी, चाट, मैकरोनी, दहीवड़ा, गोलगप्पे और शेक जैसे स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए, जिनका स्वाद उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और आगंतुकों ने भरपूर आनंद लिया। मेले का माहौल उत्सवमय रहा और पूरे परिसर में उत्साह एवं उमंग का वातावरण दिखाई दिया।

इस अवसर पर प्राचार्य ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि व्यावहारिक कौशल और रचनात्मक सोच को भी समान रूप से प्रोत्साहन देना आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में संयोजिका प्रो. शुचि अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों, सहयोगियों और उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस मेला आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में ‘सीखो और कमाओ’ की भावना को बढ़ावा देना था, जो कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों से भी मेल खाता है। कार्यक्रम ने न केवल छात्रों को अपनी कला और कौशल प्रदर्शित करने का अवसर दिया बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सार्थक कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित भी किया।

यह स्वरोजगार मेला महाविद्यालय की सृजनशीलता, एकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण रहा। सभी उपस्थित लोगों ने विद्यार्थियों की मेहनत, नवाचार और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देते हैं।

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