सुप्रीम कोर्ट में आज गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच खसरा नंबर 596 वाली जमीन पर नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाए. साथ ही कोर्ट ने इसके लिए राज्य सरकार को उचित व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया. इससे पहले मुस्लिम पक्ष की ओर से यह याचिका लगाई गई कि मध्य प्रदेश के धार में विवादित भोजशाला परिसर के पास जुमे की नमाज अदा करने के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने के अदालती निर्देशों का पालन नहीं किया गया है.कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहले दिए गए आदेश को इस हद तक स्पष्ट किया जाता है कि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच खसरा नंबर 596 वाली जमीन पर नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाए. बताया जाता है कि यह जमीन दरगाह की है. पेश किए गए साइट प्लान की कॉपी से पता चलता है कि वहां तक जाने के लिए एक अलग और स्वतंत्र रास्ता है, इसलिए वह जगह उपयुक्त लगती है. यह संबंधित जगह के पास ही है.
हिंदू पक्ष की याचिका खारिज
साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को उचित व्यवस्था करने का निर्देश भी जारी किया. इस बीच हिंदू पक्ष की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि मुझे इस याचिका में मुस्लिम पक्ष की ओर से पक्षकार नहीं बनाया गया. मैं इस मामले में अपना पक्ष रखना चाहूंगा. जैन ने कहा कि मैं कुछ पहलू उठाना चाहूंगा, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 24 जुलाई को सुनवाई के दौरान कहा था कि याचिका पर बुधवार को सुनवाई की जाएगी. हालांकि, कल बेंच के जल्दी उठ जाने की वजह से इस पर सुनवाई नहीं हो सकी थी.
आज के लिए टल गई थी सुनवाई
बेंच कल जब दिन की कार्यवाही खत्म करने वाली थी, तब सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने इस केस का उल्लेख किया. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी.इस केस का जिक्र किए जाने के दौरान, सीजेआई ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, “आप अहमदी को वैकल्पिक जगह की जानकारी क्यों नहीं देते?” अहमदी ने अपनी शिकायत में कहा, “आपके आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा. जो जगह दी गई वो 1.3 किलोमीटर दूर है और कलेक्टर ने आदेश दिया कि सिर्फ यही स्थल ही आवंटित किया जाएगा.” उन्होंने कहा कि कोर्ट के पहले के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा. इस पर मेहता ने कहा कि प्रशासन ने एक और जगह की पहचान की है.
भोजशाला के पास एक खाली जमीनः मुस्लिम पक्ष
उन्होंने बेंच से कहा, “नहीं, नहीं. हम फिर से मिले थे. हमारे पास एक और जगह है.” अहमदी ने इस प्रस्तावित जगह पर गहरी आपत्ति जताई और कहा कि यह जगह सही नहीं है और बहुत दूर है. मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह दूसरी जगह बहुत दूर है और एक ब्रुअरी (शराब बनाने की फैक्ट्री) का हिस्सा है. उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि भोजशाला स्थल के पास एक दरगाह है और उसके सामने जमीन भी खाली है जिसे आवंटित किया जा सकता है. हमें वह जगह दी जा सकती है. वे किसी एक समुदाय की दादागिरी के आगे नहीं झुक सकते.इससे पहले देश की सबसे बड़ी अदालत ने 14 जुलाई को मुस्लिम पक्ष की अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जब तक मामले का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक विवादित भोजशाला परिसर के पास ही जुमे की नमाज के लिए एक बजे से तीन बजे के बीच एक अलग खुली जगह उपलब्ध कराई जाए.























































