सर्दियों में बढ़ता माइग्रेन का खतरा: ठंड, कम रोशनी और सिकुड़ती नसें बनती हैं सिरदर्द की बड़ी वजह

सर्दियों के शुरू होते ही माइग्रेन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें सिर के एक हिस्से में तेज, चुभन जैसा दर्द महसूस होता है। इसके साथ मतली, रोशनी से परेशानी, चक्कर, आवाजों के प्रति सेंसिटिविटी और मूड स्विंग जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ठंड के मौसम में न सिर्फ माइग्रेन के मरीजों को परेशानी बढ़ती है, बल्कि आम लोग भी सिरदर्द, भारीपन और ब्लड फ्लो में हल्के बदलाव अनुभव कर सकते हैं। इस कारण मौसम बदलते ही माइग्रेन अटैक का जोखिम काफी बढ़ जाता है और इससे बचाव के लिए सावधानी और सही जानकारी बेहद जरूरी हो जाती है।

सर्दियों में माइग्रेन का दर्द कई बार सामान्य दिनों की तुलना में अधिक तेज महसूस होता है। ठंड लगने पर शरीर की मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं और इसका असर ब्रेन की रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है। नसों में कसावट आने से सिरदर्द बढ़ जाता है और कुछ लोगों में यह दर्द तेज चुभन जैसा महसूस होने लगता है। ठंड के दौरान आंखों के आसपास भारीपन, रोशनी से जलन, मतली, गर्दन में जकड़न और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण भी अधिक दिखाई देते हैं। इसके अलावा सर्दियों में कम रोशनी और छोटे दिन शरीर में सेरोटोनिन लेवल को प्रभावित करते हैं, जिससे मूड स्विंग और तनाव बढ़ सकता है, जो आगे चलकर माइग्रेन ट्रिगर कर देता है।

मौसम में अचानक बदलाव, जैसे तापमान का तेजी से गिरना, तेज सर्द हवा, कोहरा और धुंध भी माइग्रेन को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ठंड में लोग अधिक समय घर के अंदर बिताते हैं, जिससे धूप कम मिलती है और शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक भी प्रभावित होने लगती है। नींद की अनियमितता, कम पानी पीना, देर रात तक जागना, अनियमित भोजन और शरीर में विटामिन डी की कमी भी सर्दियों में माइग्रेन को बढ़ाने वाले कारकों में से हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड के मौसम में खुद को गर्म रखना, पर्याप्त पानी पीना, नियमित दिनचर्या बनाए रखना, हेल्दी डाइट लेना और धूप जरूर लेना माइग्रेन के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। सर्दियों में थोड़ी सी सावधानी माइग्रेन के दर्द से बड़ी राहत दे सकती है।

सर्दियों में माइग्रेन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

सर्वोदय अस्पताल में न्यूरोसर्जरी विभाग में डॉ. गंगेश गुंजन बताते हैं कि सर्दियों में तापमान कम होने से शरीर की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्रेन तक ब्लड-फ्लो में हल्का बदलाव आता है. यह बदलाव माइग्रेन ट्रिगर कर सकता है. मौसम का अचानक बदलना, ठंडी हवा लगना, नाक बंद होना या संक्रमण जैसी सामान्य सर्दियां भी सिरदर्द को बढ़ा सकती हैं.

इसके अलावा, सर्दियों में धूप कम मिलने से सेरोटोनिन का स्तर गिर जाता है, जो मूड और ब्रेन एक्टिविटी को संतुलित रखता है. यह हॉर्मोनल बदलाव भी माइग्रेन अटैक की संभावना बढ़ाता है. हीटर चलाने से कमरे की हवा में सूखापन बढ़ जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन होता है और माइग्रेन तेज महसूस होता है. सभी लोग माइग्रेन के मरीज न हों, फिर भी ठंड के कारण सिरदर्द का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि ब्रेन ठंड के प्रति काफी सेंसिटिव होता है.

कैसे करें बचाव?

ठंडी हवा से सिर और कान को ढकें.

धूप में 1520 मिनट जरूर बैठें.

पर्याप्त पानी पिएं, शरीर को डिहाइड्रेट न होने दें.

बहुत ठंडे कमरे, हीटर या तापमान के उतारचढ़ाव से बचें.

नियमित नींद और दिनचर्या बनाए रखें.

स्ट्रेस कम करने के लिए मेडिटेशन या हल्की एक्सरसाइज करें.

माइग्रेन ट्रिगर करने वाली चीजें जैसे बहुत कैफीन और फास्ट फूड सीमित करें.

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