भारतीय नौसेना तेजी से अपने आधुनिकीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है। वर्तमान में भारतीय नौसेना के लिए 50 युद्धपोत निर्माणाधीन हैं, जो देश की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत करेंगे। अगले 12 महीनों में, लगभग हर महीने एक नया युद्धपोत नौसेना में शामिल किया जाएगा, जिससे इसकी युद्धक क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी निर्माण को भी प्रोत्साहित करती है, जिसमें भारतीय शिपयार्ड और रक्षा कंपनियों की प्रमुख भूमिका है।
सबसे अधिक हथियारों और सेंसरों से लैस
ये युद्धपोत सबसे अच्छे हथियारों और सेंसर्स से लैस होंगे, जिससे नौसेना की युद्ध क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. ये सभी युद्धपोत ते रफ्तार के होंगे, दुश्मन के युद्धपोत या जमीनी ठिकाने पर हमला करने वाली मिसाइलों से लैस होंगे. इनमें एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ हवाई हमलों की टोह लेने के सिस्टम भी होंगे.
ये युद्धपोत 35 नॉट तक की रफ्तार पर पहुंचने में सक्षम होंगे और इनमें 93 नौ-सैनिकों को तैनात भी किया जा सकेगा. हमला करने के लिए इसमें 8 ब्रह्मोस लगाई जा सकेंगी. हवाई हमले से सुरक्षा के लिए इनमें 32 मिसाइलें लगाने की जगह होगी.
तेजी से आधुनिक बन रही भारतीय नौसेना
भारतीय नौसेना खुद को तेजी से आधुनिक बना रही है. इस समय भारतीय नौसेना के 50 युद्धपोत निर्माणाधीन हैं और अगले 12 महीनों में लगभग हर महीने एक युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल होगा.
इन युद्धपोतों के निर्माण का काम 16 दिसंबर को यानी विजय दिवस पर आरंभ हुआ है जो 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इस युद्ध में उल्लेखनीय कार्रवाई भारतीय नौसेना का कराची बंदरगाह पर हमला था जिसने पाकिस्तान की नौसेना की कमर तोड़ दी थी.















