रामनवमी पर अयोध्या में रामलला का दिव्य सूर्य तिलक,

रामनवमी के पावन अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब श्री रामलला के विग्रह पर दिव्य ‘सूर्य तिलक’ किया गया। चैत्र नवरात्रि के समापन दिवस पर आयोजित इस विशेष आयोजन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। निर्धारित समय पर सूर्य की किरणें विशेष वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से सीधे भगवान श्रीराम के ललाट पर पड़ीं और लगभग पांच मिनट तक उनका तेजस्वी तिलक दमकता रहा। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, वहीं देश-विदेश में भी इसका सीधा प्रसारण देखा गया।

‘सूर्य तिलक’ की यह प्रक्रिया मंदिर निर्माण में शामिल वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की महीनों की मेहनत का परिणाम है, जिसमें दर्पण और लेंस की सहायता से सूर्य की किरणों को सटीक स्थान पर केंद्रित किया गया। जैसे ही सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ीं, पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भावविभोर हो गए। यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के अद्भुत संगम का भी उदाहरण बना।

इस अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था, फूलों और रोशनी से सजी अयोध्या नगरी पूरी तरह उत्सव के रंग में डूबी नजर आई। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रामनवमी पर हुआ यह ‘सूर्य तिलक’ आयोजन आने वाले वर्षों में भी एक नई परंपरा के रूप में स्थापित होने जा रहा है, जो न केवल आस्था को और प्रगाढ़ करेगा बल्कि अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में और सशक्त बनाएगा।

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