उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर राकेश टिकैत का बड़ा आरोप

मुज़फ़्फरनगर। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक दिए गए इस्तीफे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर विपक्ष पहले ही इस इस्तीफे को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं अब किसान नेता राकेश टिकैत ने भी बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर दावा किया है कि यह इस्तीफा धनखड़ ने स्वेच्छा से नहीं दिया, बल्कि यह उनसे “जबरन लिया गया” है। टिकैत का कहना है कि जिस समाज से जगदीप धनखड़ आते हैं, उसमें लोग जीवन की अंतिम घड़ी तक अपनी जमीन तक नहीं छोड़ते, ऐसे में देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद यूं ही त्याग देना बेहद असामान्य और संदेहास्पद है।टिकैत ने आरोप लगाया कि धनखड़ से हाल ही में किसान, ग्रामीण पृष्ठभूमि और शिक्षा जैसे मुद्दों पर कुछ बयान दिलवाए गए, और इसके बाद अचानक बीमारी का बहाना बनाकर उन्हें पद से हटने को मजबूर किया गया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “जाट तो मरते वक्त भी अपनी जमीन किसी को नहीं देता, इस्तीफा देना तो बहुत बड़ी बात है। अगर उन्होंने इस्तीफा दिया है, तो ज़रूर कोई न कोई दबाव रहा होगा।”उन्होंने आगे बताया कि उन्हें गांवों से लगातार फोन कॉल्स आ रहे हैं, जिनमें लोगों का यही कहना है कि यह इस्तीफा ‘दिया नहीं गया, लिया गया है’। टिकैत ने इस पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित साजिश करार दिया और दावा किया कि यह पहले से ही तय था। उन्होंने आशंका जताई कि इस पूरी प्रक्रिया का अगला कदम बिहार की सत्ता को निशाना बनाना हो सकता है। टिकैत ने यह भी इशारा किया कि संभव है अगला उपराष्ट्रपति बिहार से चुना जाए ताकि वहां की मौजूदा सरकार पर दबाव बनाया जा सके।सत्ता के खेल पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अब संवैधानिक पदों का भी बंटवारा राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts