बलात्कारी को जमानत पर राहुल गांधी का तीखा हमला, बोले– पीड़िता डर में और आरोपी आज़ाद, ये कैसा न्याय?

कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद सियासी गलियारों में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि जब पीड़िता आज भी डर के साये में जी रही है, तब बलात्कार के आरोपी को जमानत मिलना किस तरह का न्याय है। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे फैसले समाज को गलत संदेश देते हैं और महिलाओं के न्याय के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

उन्होंने कहा कि पीड़िता ने साहस दिखाकर न्याय के लिए आवाज उठाई, लेकिन इसके बावजूद उसे डर और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आरोपी को जमानत मिलना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि यह पूरे न्याय तंत्र की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। राहुल गांधी ने पूछा कि क्या न्याय के लिए लड़ना पीड़िता की गलती थी? अगर ऐसा है तो फिर महिलाओं को कानून पर भरोसा कैसे दिलाया जाएगा।राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में सख्ती दिखाने की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में पीड़िताओं को न्याय मिलने में लंबा इंतज़ार करना पड़ता है। जमानत जैसे फैसले पीड़िता के मनोबल को तोड़ते हैं और समाज में डर का माहौल बनाते हैं।इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर विफल रहने का आरोप लगाया है। वहीं, महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।कुल मिलाकर, कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या हमारा न्याय तंत्र पीड़िताओं के पक्ष में पर्याप्त रूप से संवेदनशील है, या फिर ताकतवर आरोपियों को राहत मिलती रहेगी और पीड़िताएं डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगी।

दिल्ली HC ने दी सेंगर को जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने कल यानी 23 दिसंबर को पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत दी थी. कोर्ट ने सेंगर को शर्तों के साथ जमानत दी थी. साथ ही उनकी उम्र कैद की सजा पर भी रोक लगा दी गई. जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया था. निचली अदालत ने 2019 में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई थी.कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सेंगर को 15 लाख रुपये का निजी मुचलका भरना होगा और इतनी ही रकम के तीन जमानतदार पेश करने होंगे. इसके साथ ही कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाईं. इस केस की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी. उन्नाव रेप केस का ये मामला साल 2017 का है. इसके एक साल बाद अप्रैल 2018 में सेंगर की गिरफ्तारी हुई थी.

सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी पीड़िता

उन्नाव रेप केस की पीड़िता कुलदीप सिंह सेंगर की सजा सस्पेंड करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी. पीड़िता ने सेंगर की सजा पर रोक को अपने परिवार के लिए मौत बताया और कहा कि वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी.

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