मुजफ्फरनगर। जिले में गंगा संरक्षण और जल स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला गंगा समिति की ओर से ब्लॉक बुढ़ाना स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर “हमारे जनपद में नदियां” विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कराई गई, जिसमें विद्यालय की छात्राओं ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी छात्राओं को जिले की प्रमुख नदियों और उनके महत्व के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि गंगा, सोलानी (जिसे बाणगंगा भी कहा जाता है), काली नदी और हिंडन नदी इस क्षेत्र की प्रमुख नदियां हैं। इन नदियों का सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से गहरा महत्व है। छात्राओं को न केवल इन नदियों के बारे में ऐतिहासिक और भौगोलिक जानकारी दी गई, बल्कि उनके किनारे पाई जाने वाली जलीय जीव–जंतुओं की विविधता पर भी प्रकाश डाला गया।प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को उपहार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। साथ ही, छह छात्राओं को सांत्वना पुरस्कार देकर उनकी मेहनत और प्रयास की सराहना की गई। इस अवसर पर कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं बालिकाओं में सीखने और समझने की रुचि तो बढ़ाती ही हैं, साथ ही उन्हें अपने पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझने का अवसर भी प्रदान करती हैं।कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. राजीव कुमार ने छात्राओं को गंगा और अन्य नदियों की स्वच्छता, उनके संरक्षण और जलजंतुओं की रक्षा के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि नदियां केवल जल का स्रोत ही नहीं बल्कि जीवन और संस्कृति का आधार भी हैं। इसलिए हमें सभी को मिलकर इनकी स्वच्छता और अस्तित्व को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। इसी क्रम में छात्राओं को “गंगा स्वच्छता शपथ” भी दिलाई गई, जिसमें उन्होंने नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने और उनके संरक्षण के लिए अपने स्तर से प्रयास करने का संकल्प लिया।इस आयोजन में जिला परियोजना अधिकारी हर्ष कुमार की सक्रिय भूमिका रही। उन्होंने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और नदी स्वच्छता जैसे विषयों पर ज्ञान प्राप्त करना और उसे व्यवहार में लाना हम सबकी जिम्मेदारी है। वार्डन रश्मि रानी और विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने भी पूरे कार्यक्रम में महत्वपूर्ण सहयोग दिया और छात्राओं को उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।समापन पर आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के साथ–साथ पर्यावरणीय जागरूकता भी बच्चों के जीवन का एक आवश्यक हिस्सा होना चाहिए। जब बच्चे छोटी उम्र से ही नदियों और प्रकृति के महत्व को समझेंगे तो भविष्य में वे एक जिम्मेदार नागरिक बनकर पर्यावरण की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस कार्यक्रम ने न केवल छात्राओं के ज्ञान को बढ़ाया बल्कि उन्हें नदियों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय सोच विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया।















