2001 के बाद पार्ट-टाइम और डिस्टेंस एलएलबी अमान्य,

वकीलों और लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए बेहद अहम है. सरकार ने साफ कर दिया है कि 2001 के बाद पार्ट टाइम, इवनिंग और डिस्टेंस मोड से की गई एलएलबी डिग्रियों को मान्यता नहीं दी जाएगी. इससे हजारों ऐसे लोगों को झटका लगा है, जिन्होंने नौकरी के साथ-साथ या वैकल्पिक माध्यमों से लॉ की पढ़ाई पूरी की थी. विधि एवं न्याय मंत्रालय ने संसद में यह स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के अनुसार अब केवल रेगुलर और फुल-टाइम लॉ डिग्री ही मान्य है. इस फैसले से एडवोकेट एनरोलमेंट से जुड़े नियमों पर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है.विधि एवं न्याय मंत्रालय ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया गैर-नियमित माध्यमों से की गई एलएलबी डिग्रियों को मान्यता नहीं देता. इसमें इवनिंग क्लास, नाइट स्कूल, पार्ट टाइम, वीकेंड, ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन से की गई लॉ डिग्री शामिल हैं. खासतौर पर शैक्षणिक सेशन 2000-2001 के बाद शुरू किए गए ऐसे सभी कोर्स अब अमान्य माने जाते हैं. इसका मतलब है कि इन डिग्रियों के आधार पर वकील के रूप में नामांकन नहीं कराया जा सकता.

कब और क्यों बदले नियम?

मंत्रालय ने बताया कि लीगल एजुकेशन रूल्स, 1989 के तहत पहले कुछ विश्वविद्यालयों को इवनिंग एलएलबी कोर्स चलाने की अनुमति थी. दिल्ली समेत कुछ राज्यों में यह व्यवस्था मौजूद थी, लेकिन लीगल एजुकेशन रूल्स, 1999 लागू होने के बाद नीति में बड़ा बदलाव हुआ. इसके तहत 2000-2001 से पूरे देश में इवनिंग लॉ कोर्स की मान्यता समाप्त कर दी गई.

वर्तमान नियम क्या कहते हैं?

वर्तमान में लागू लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 के अनुसार एलएलबी एक नियमित और पूर्णकालिक प्रोफेशनल कोर्स होना चाहिए, इसमें रोजाना और साप्ताहिक क्लास घंटे, न्यूनतम उपस्थिति और सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक पढ़ाई का तय समय जरूरी है.

2000 से पहले की डिग्रियों का क्या होगा?

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों ने 1999-2000 तक इवनिंग मोड से एलएलबी पूरी कर ली थी, वो वकील के रूप में नामांकन के पात्र हैं. लेकिन इसके बाद ऐसे माध्यमों से ली गई डिग्रियां मान्य नहीं होंगी.

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