कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों के संसद चलो अभियान के दौरान लाठीचार्ज पर विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर हमला बोला है. विपक्षी पार्टियों ने लाठीचार्ज की निंदा की है और इसे लेकर सरकार पर सवाल खड़ा किया है. कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल साइट एक्स पर लिखा, प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं, इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते.उन्होंने लिखा, 152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित और सजा एक दोषी को भी नहीं. सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को. और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज सवाल उठाए – तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत.
राहुल ने सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने कहा कि लीक करने वाले अपराधी आजाद – और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं. यह सरकार सिर्फ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही – उनपर टूट पड़ी है.

लाठीचार्ज पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने लिखा कि युवाओं को बड़े पैमाने पर चोट लगी है, बड़े पैमाने पर घायल हुए हैं, ये सबसे बड़ा फेलियर है. उन्होंने कहा कि आप नीट की परीक्षा नहीं करा पा रहे हैं, जो परीक्षा कराई उसमें जो धांधली हुई उसमें सब बीजेपी के लोग शामिल हैं.
अखिलेश ने भी उठाए सवाल
इससे पहले अखिलेश यादव ने लिखा कि निराशा में आंख का पानी जब समुंदर बन जाता है इंकलाब तब आता है!!! कोई अपनी ताकत पर, जब सर उठा इठलाता है, इंकलाब तब आता है!कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लाठीचार्ज पर कहा कि यह बहुत दुखद है. मेरा मतलब है, मुझे समझ नहीं आता कि ये कुछ चीजें किस भावना से की जा रही हैं. जब बिना हिंसा के विरोध हो रहा है, तो लाठीचार्ज का क्या कारण है? लाठीचार्ज बिना हिंसा के काम नहीं है; यह हिंसा का काम है. मुझे इसका लॉजिक समझ नहीं आता.”
शशि थरूर ने भी साधा निशाना
पार्लियामेंट में विपक्ष के मुद्दों पर शशि थरूर ने कहा कि एक मुद्दा अयोध्या में चंदे की चोरी है, दूसरा NEET एग्जाम है, स्टूडेंट्स से जुड़े मामले हैं जिन्हें कांग्रेस कई महीनों से उठा रही है. हमारी रिक्वेस्ट बस इतनी थी कि इन मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. सरकार कुछ भी मानने को तैयार नहीं है.उन्होंने कहा कि अगर पार्लियामेंट के अंदर चर्चा होती है, तो यह सबके लिए अच्छा है. मुझे नहीं पता कि चर्चा करने में उन्हें इतना डर क्यों लगता है. उनके पास बहुत बड़ी मेजोरिटी है, इसलिए पार्लियामेंट में देश की आवाज सुनी जानी चाहिए; पार्लियामेंट का मकसद ही यही है, लेकिन जब आप मना करते हैं और सिर्फ अपने टॉपिक उठाने पर अड़े रहते हैं, तो विपक्ष स्वाभाविक रूप से नाखुश हो जाता है. यही तो पूरी बात है.























































