अतर्रा (बांदा)। राजकीय इंजीनियरिंग कालेज, बाँदा के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आईईईई- एसटीबी (11533) और स्टूडेंट डेवलपर क्लब (आईटी) के तत्वावधान में गुरूवार को एडवांसमेंट इन साइबर डिफेन्स एंड डिजिटल फॉरेंसिक्सष् विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वागत, दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद विभागाध्यक्ष एवं संयोजक, डा. विभाष यादव, ने स्वागत उद्बोधन में सेमिनार के उद्देश्य एवं रूपरेखा पर प्रकाश डाला। माननीय निदेशक महोदय, प्रोफेसर एस.पी. शुक्ल, ने अपने शुभकामना संदेश में साइबर सुरक्षा जैसे समसामयिक विषय पर ऐसे आयोजन की सराहना की और विद्यार्थियों को साइबर जागरूकता और शोधदृउन्मुख सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रथम सत्र में शिवराज अपर पुलिस अधीक्षक, बाँदा ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप पर अपने अनुभवदृआधारित व्याख्यान में जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक साइबर अपराधों, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और साइबर फोरेंसिक की जटिलताओं पर प्रकाश डाला, साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका और डिजिटल सावधानी की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। पुलिस प्रशासन के इस व्यावहारिक दृष्टिकोण से छात्रों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे। द्वितीय सत्र में ऑनलाइन माध्यम से डॉ. अनुप गिरधर (सीईओ एवं संस्थापक, सेडुलिटी साल्यूशन्स एंड टेक्नोलॉजी) ने आधुनिक तकनीकी साइबर सुरक्षा पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने नेटवर्क सुरक्षा, थ्रेट इंटेलिजेंस और एथिकल हैकिंग के साथ-साथ एप्लिकेशन के सुरक्षित उपयोग और कॉरपोरेट स्तर पर अपनाई जाने वाली सुरक्षा नीतियों पर सारगर्भित चर्चा की, जो विद्यार्थियों को उद्योगदृसंबंधी ज्ञान प्रदान करने में सहायक रहा। तृतीय सत्र में श्री संजय शर्मा (वरिष्ठ सुरक्षा एवं अनुपालन विशेषज्ञ, अटारी) ने अपने औद्योगिक अनुभव के आधार पर सूचना सुरक्षा नीतियों, कम्प्लायंस फ्रेमवर्क, क्लाउड सिक्योरिटी और उद्यम स्तर पर जोखिम प्रबंधन जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने वास्तविक औद्योगिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि संगठन साइबर खतरों से डेटा एवं अवसंरचना की सुरक्षा कैसे कर सकते हैं, जिससे विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा क्षेत्र में करियर और नवाचार की संभावनाओं के बारे में जानकारी मिली। सेमिनार की सफलता में छात्रों की सक्रिय सहभागिता अत्यंत सराहनीय रही। चतुर्थ वर्ष के छात्र जिवांशु, ऋषभ, आंचल, निहाल और आदित्य, तथा तृतीय वर्ष के अनिवेश, क्षितिज, अभिमन्यु, सेजल और शिवांजलि ने कार्यक्रम प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुश्री सोनाली पांडेय एवं अभिषेक कुमार यादव का फैकल्टी सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा, और अभिजीत सिंह ने पूरे आयोजन का सफल संचालन एवं समन्वय किया। अंत में, माननीय निदेशक महोदय प्रोफेसर एस.पी. शुक्ल द्वारा समापन टिप्पणी प्रस्तुत की गई, जिसमें उन्होंने छात्रों को आज प्राप्त ज्ञान को व्यवहार और अनुसंधान में लागू करने के लिए प्रे















