राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर कवि सम्मेलन, गहोई समाज ने दिया एकता और साहित्य का संदेश

औरैया। गोपाल वाटिका में गहोई वैश्य सेवा समिति द्वारा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 139वीं जयंती पर भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गहोई समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कुमार कठिल ने कहा कि कवि समाज का दर्पण होता है और कविताएं हमें जीवन में प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि गुप्त द्वारा दिखाए मार्ग पर चलना ही आज के समाज की आवश्यकता है। उन्होंने वर्तमान और पूर्व के पहनावे में अंतर की चर्चा करते हुए समाज में एकता बनाए रखने पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष अनूप गुप्ता ने कहा कि कवि सम्मेलन जैसे आयोजन न केवल नगर में बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी आयोजित किए जाने चाहिए ताकि साहित्यिक जागरूकता गांव-गांव तक पहुंचे। कार्यक्रम अध्यक्ष, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने गौ सेवा को आत्मा की संतुष्टि का माध्यम बताते हुए इसके प्रसार की आवश्यकता जताई।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। इस अवसर पर समाज के एक दर्जन से अधिक वरिष्ठ मार्गदर्शकों को गुप्त की प्रतिमा व पुष्पमाला भेंट कर सम्मानित किया गया।

कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने श्रोताओं को कविता, ग़ज़ल और हास्य-व्यंग्य से बांधे रखा। इटावा की कवयित्री योग्यता चौहान ने मां शारदे की वंदना से शुरुआत की। कानपुर से आए हास्य कवि हेमंत पांडे की रचनाओं पर दर्शकों ने खूब ठहाके लगाए। धीरज सिंह चंदन, मधुप श्रीवास्तव, प्रतीक चौहान, प्रमोद भारती, प्रकाश गुप्ता और गोविंद द्विवेदी की कविताओं ने भी खूब तालियां बटोरीं।

नगर के वरिष्ठ कवि गोपाल पांडे, रवि शंकर शुक्ला, अनिरुद्ध त्रिपाठी, शर्मिष्ठा गहोई सहित बाल कवियों ने भी मंच को सजाया। कार्यक्रम का संचालन गोपाल पांडे ने किया। कार्यक्रम में गहोई समाज के संरक्षक, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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