मुजफ्फरनगर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों, विशेषकर तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की जा रही ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इस अभियान के क्रम में अपर पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन मेरठ एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक, सहारनपुर परिक्षेत्र सहारनपुर के निर्देशन तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ एवं क्षेत्राधिकारी अपराध के निकट पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह, थाना साइबर क्राइम के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सुनियोजित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी में लिप्त अभियुक्तों को गिरफ्तार किया।
गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित ऑनलाइन पोर्टल “प्रतिबिम्ब” पर जनपद मुजफ्फरनगर से संबंधित कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें बताया गया था कि अज्ञात व्यक्ति फर्जी कॉल कर लोगों को खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते थे। आरोपियों द्वारा पीड़ितों को वीडियो कॉल पर डराया-धमकाया जाता और उनके बैंक खातों की जानकारी लेकर धनराशि ट्रांसफर कराई जाती थी। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए थाना साइबर क्राइम ने प्रत्येक प्रकरण की गहन जांच शुरू की।
जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन की बारीकी से पड़ताल की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि ठगी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर तथा बैंक खाते जनपद मुजफ्फरनगर में संचालित हो रहे थे। इसके बाद पुलिस टीम ने संदिग्ध खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगाली और संबंधित व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित की। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने दबिश देकर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में यह भी पता चला कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम विभिन्न खातों में स्थानांतरित की थी, जिससे ट्रेस करना कठिन हो सके।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। थाना साइबर क्राइम पर आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर घबराएं नहीं और अपनी व्यक्तिगत या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। यदि कोई स्वयं को किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर धन की मांग करे तो तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें।मुजफ्फरनगर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के विरुद्ध एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अपराधियों के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा और जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।















