मुजफ्फरनगर में मानव दुर्व्यवहार विरोधी दिवस के अवसर पर जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन संस्था एवं ग्रामीण समाज विकास केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में बाल सुरक्षा को लेकर एक अहम पहल की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनपद में बच्चों की तस्करी (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) और दुर्व्यवहार जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करना रहा। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति, मानव तस्करी विरोधी थाना, रेलवे पुलिस, राजकीय रेलवे पुलिस, रेलवे विभाग, विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बाल संरक्षण इकाई समेत कई विभागों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
बैठक में मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सामूहिक रूप से इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई तभी प्रभावी हो सकती है जब सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करें। वक्ताओं ने माना कि कानून का भय केवल तभी उत्पन्न हो सकता है जब बाल व्यापार में लिप्त अपराधियों को शीघ्र और कठोर सजा दी जाए। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बच्चों की ट्रैफिकिंग से निपटने में कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनसे निपटने के लिए प्रशासनिक तालमेल और समयबद्ध कानूनी प्रक्रिया बेहद आवश्यक है।
संस्था के सचिव मेहर चंद ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से 30 जुलाई तक जनपद के विभिन्न हिस्सों में चाइल्ड ट्रैफिकिंग को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें विभिन्न विभागों ने मिलकर लोगों को उनके अधिकारों और कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज में इस मुद्दे पर पर्याप्त जागरूकता फैलाई जाए और कानूनी कार्यवाही समय पर की जाए, तो बच्चों की तस्करी को रोकना संभव है।
कार्यक्रम में यह भी विचार व्यक्त किया गया कि यह केवल एक सामाजिक अभियान नहीं, बल्कि एक मजबूत कानूनी एवं प्रशासनिक पहल है, जिसके जरिए न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है बल्कि उन संगठित अपराध गिरोहों का भी सफाया किया जा सकता है जो बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं। इस प्रकार की समन्वित कार्रवाई से ही बाल सुरक्षा का मजबूत ढांचा तैयार किया जा सकता है।















