मुजफ्फरनगर में प्रशासन द्वारा 50 से अधिक दुकानों वाली एक कथित अवैध मार्केट को सील किए जाने की कार्रवाई के बाद पूरे जिले में चर्चा का माहौल बना हुआ है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित मार्केट नियमों के विपरीत विकसित की गई थी, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई।
हालांकि इस कदम के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आ गए हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि यदि मार्केट वास्तव में अवैध थी तो आखिर यह वर्षों तक संचालित कैसे होती रही। जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब संबंधित विभागों ने कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। लोगों का यह भी सवाल है कि मार्केट को बिजली, पानी, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाएं कैसे उपलब्ध होती रहीं, जबकि अब इसे अवैध बताया जा रहा है।
कार्रवाई का सबसे अधिक असर उन दुकानदारों और कर्मचारियों पर पड़ा है जिनकी आजीविका इस मार्केट से जुड़ी हुई थी। कई व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर दुकानें खरीदीं या किराए पर लीं और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि निर्माण संबंधी कोई विवाद या अनियमितता मौजूद है। ऐसे में वे खुद को इस पूरे मामले में पीड़ित मान रहे हैं। दूसरी ओर आमजन का मानना है कि यदि निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के तहत कार्रवाई होना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ उन अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए जिनके कार्यकाल में यह मार्केट बनी और वर्षों तक चलती रही। अब लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई केवल मार्केट सील करने तक सीमित रहती है या फिर मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की जवाबदेही भी तय की जाती है। फिलहाल यह मामला जिले में बहस और चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।















