मुजफ्फरनगर में कलेक्ट्रेट स्थित इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर से एक महत्वपूर्ण मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल की निगरानी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार ने की। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की देखरेख में एक साथ प्रदेश के 34 जनपदों में यह अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि आपदा के समय जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। इस मौके पर मुजफ्फरनगर जिले के तमाम प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे और अपनी–अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया।इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस अधीक्षक अपराध, नगर मजिस्ट्रेट, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, ए.आर.टी.ओ., मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, कोषाधिकारी, अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण, स्काउट गाइड सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने इस अभ्यास में सक्रिय रूप से भाग लिया और आपदा की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों का अनुकरण किया। यह मॉक ड्रिल वास्तविक आपातकालीन परिस्थिति की झलक पेश करती नजर आई, जिसमें राहत, बचाव और समन्वय की कार्यवाही को प्राथमिकता दी गई।अपर जिलाधिकारी गजेंद्र कुमार ने कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल से अधिकारियों और कर्मचारियों को वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव होता है और संकट की घड़ी में त्वरित एवं सटीक निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों के बारे में दिशा–निर्देश दिए और कहा कि जनपद स्तर पर इस प्रकार के अभ्यास समय–समय पर होना जरूरी है। इससे न केवल विभागीय तालमेल मजबूत होता है बल्कि जनता को भी भरोसा मिलता है कि किसी भी आपात स्थिति में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पूरी तरह तैयार हैं।राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य जिले में उपलब्ध संसाधनों की पहचान करना और उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, यह भी देखा गया कि किस विभाग से किस समय किस प्रकार की भूमिका निभाने की अपेक्षा है और उसमें किस तरह की चुनौतियां आ सकती हैं। विशेष रूप से स्वास्थ्य, पुलिस, अग्निशमन और परिवहन विभागों को आपदा प्रबंधन में अहम माना गया है और उनकी भूमिका इस अभ्यास के दौरान स्पष्ट रूप से सामने आई।अभ्यास के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरनगर जिला संवेदनशील क्षेत्रों में आता है, जहां बाढ़, भूकंप या औद्योगिक हादसों जैसी आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर को सशक्त बनाना और अधिकारियों को प्रशिक्षित करना समय की मांग है। मॉक ड्रिल के माध्यम से अधिकारियों ने राहत शिविर लगाने, घायलों को प्राथमिक उपचार देने, वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने और बिजली–पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखने का अभ्यास किया।कार्यक्रम में यह भी सुनिश्चित किया गया कि स्थानीय स्तर पर स्काउट गाइड जैसे सामाजिक संगठनों की भी भागीदारी हो, ताकि आपदा के समय सरकारी तंत्र को सहयोग मिल सके। अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि मॉक ड्रिल सिर्फ औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे व्यावहारिकता से जोड़ना चाहिए ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में जनता को तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।















