लगातार बढ़ता काम का दबाव, लंबी ड्यूटी और मानसिक थकान डॉक्टरों को भी होती है. बीते कुछ सालों में यह डॉक्टरों के लिए एकगंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है. लगातार काम का प्रेशर डॉक्टरों की भी मेंटल हेल्थ पर असर डाल रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के कई अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों को सप्ताह में 80 से 100 घंटे तक काम करना पड़ता है. इमरजेंसी ड्यूटी, लगातार नाइट शिफ्ट, संसाधनों की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या मानसिक दबाव बढ़ा रही है.इससे डॉक्टरों की हेल्थ पर भी असर पड़ रहा है. कुछ मामलों में मानसिक स्वास्थ्य काफी बिगड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि Mental Healthcare Act 2017 हर व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकार देता है, लेकिन कई डॉक्टर सामाजिक कलंक और करियर पर असर के डर से मदद लेने से बचते हैं. लेकिन इस वजह से उनकी सेहत और भी बिगड़ रही है.
डॉक्टरों में मानसिक तनाव की बड़ी वजहें
विशेषज्ञों के मुताबिक देश के कई अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों को सप्ताह में 80 से 100 घंटे तक काम करना पड़ता है. इमरजेंसी ड्यूटी, लगातार नाइट शिफ्ट, संसाधनों की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या मानसिक दबाव बढ़ा रही है. कई रिसर्च में पता चला है कि 64 प्रतिशत डॉक्टर ज्यादा काम को मानसिक तनाव की मुख्य वजह मानते हैं. 44 प्रतिशत मेडिकल छात्र पढ़ाई और प्रदर्शन के दबाव से मानसिक तनाव महसूस करते हैं.
#हौसला_रख अभियान की शुरुआत
इसी मुद्दे को लेकर वरिष्ठ चिकित्सक Dr Pankaj Solanki ने हौसला_रख अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान का मकसद डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत शुरू करना है. डॉ. सोलंकी का कहना है कि आम लोगों की तरह डॉक्टर भी मानसिक तनाव, थकान के शिकार होते हैं, लेकिन इसपर चर्चा नहीं होती. उन्होंने कहा कि डॉक्टर भी इंसान हैं. लगातार काम का दबाव, नींद की कमी और मरीजों की जिम्मेदारी उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है. ऐसे में जरूरी है कि डॉक्टर बिना झिझक मदद ले सकें.हौसला_रख अभियान के माध्यम से डॉ. पंकज सोलंकी एक ऐसा सहायक वातावरण तैयार करना चाहते हैं, जहां डॉक्टर बिना झिझक अपनी भावनात्मक कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात कर सकें
मरीजों पर भी पड़ रहा है असर
डॉ. सोलंकी ने कहा कि अगर इलाज करने वाला डॉक्टर लगातार तनाव में रहेगा तो इसका असर मरीजों की देखभाल पर भी पड़ सकता है. थकान और मानसिक दबाव के कारण निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य को सिर्फ डॉक्टरों की व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि हेल्थ सिस्टम के मुद्दे के रूप में देखने की जरूरत है. जल्द से जल्द इस समस्या के समाधान का रास्ता खोजना होगा.
ये कदम उठाने की जरूरत
रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए काम के घंटे तय किए जाएं
उनको पर्याप्त आराम
काउंसलिंग सुविधा मिलें
मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन की सुविधा मिले
अस्पतालों में सपोर्ट सिस्टम हो























































